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केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने दिल्ली के नरेला-बवाना और ओखला वेस्ट टू एनर्जी प्लांट की परियोजनाओं का शिलान्यास किया। इन परियोजनाओं के पूरा होने से दिल्ली में ठोस कचरे का स्थायी समाधान प्राप्त होगा और कचरे से ऊर्जा उत्पादन में महत्वपूर्ण योगदान मिलेगा। इस योजना के तहत न केवल कचरे की समस्या हल होगी, बल्कि प्रदूषण और लैंडफिल साइटों के दबाव में भी कमी आएगी।
नरेला-बवाना वेस्ट टू एनर्जी प्लांट: 3,000 मीट्रिक टन प्रतिदिन की क्षमता
नरेला-बवाना में प्रस्तावित वेस्ट टू एनर्जी प्लांट की क्षमता 3,000 मीट्रिक टन प्रतिदिन होगी, और इसे दिसंबर 2027 तक चालू करने का लक्ष्य रखा गया है। दिल्ली में प्रतिदिन लगभग 11,000 टन ठोस कचरा उत्पन्न होता है, जिसमें से 27 प्रतिशत कचरे को ऊर्जा में बदला जाएगा। इससे दिल्ली की प्रमुख लैंडफिल साइटों जैसे भलस्वा, गाजीपुर और ओखला पर दबाव कम होगा, जो वर्तमान में बदबू, जहरीली गैसें, जलभराव और मच्छरजनित बीमारियों का कारण बन रही हैं।
ओखला वेस्ट टू एनर्जी प्लांट का विस्तार
ओखला वेस्ट टू एनर्जी प्लांट की क्षमता भी बढ़ाई जाएगी। वर्तमान में यह प्लांट 2,000 मीट्रिक टन प्रतिदिन क्षमता के साथ काम कर रहा है, लेकिन इसे अब 1,000 मीट्रिक टन प्रतिदिन की अतिरिक्त क्षमता के साथ 3,000 मीट्रिक टन प्रतिदिन तक बढ़ा दिया जाएगा। इस विस्तार से दक्षिण दिल्ली और पूरे एनसीआर में कचरे का दबाव कम होगा और बड़ी मात्रा में ऊर्जा का उत्पादन भी होगा, जो दिल्ली की बिजली जरूरतों को आंशिक रूप से पूरा करेगा।
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ठोस कचरे का वैज्ञानिक निस्तारण: 6,000 मीट्रिक टन प्रतिदिन
नरेला-बवाना और ओखला प्लांट के विस्तार के बाद दिल्ली में प्रतिदिन लगभग 6,000 मीट्रिक टन कचरे का वैज्ञानिक निस्तारण किया जाएगा, जो कि दिल्ली के कुल ठोस कचरे का लगभग आधा हिस्सा होगा। इससे दिल्लीवासियों को एक साफ-सुथरा वातावरण मिलेगा, प्रदूषण में कमी आएगी, बिजली उत्पादन में वृद्धि होगी, और लैंडफिल साइटों से राहत मिलेगी।
यह योजना कई दृष्टियों से फायदेमंद
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स्थायी कचरा निस्तारण: नई डंपिंग साइटों की आवश्यकता में कमी आएगी।
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प्रदूषण नियंत्रण: जहरीली गैसों और बदबू से होने वाले प्रदूषण पर अंकुश लगेगा।
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ऊर्जा आपूर्ति में वृद्धि: बिजली उत्पादन के जरिए ऊर्जा आपूर्ति को सहारा मिलेगा।
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सड़क और नालियों की सफाई: संगठित कचरा संग्रहण से सड़कें और नालियां साफ रहेंगी।
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह द्वारा इस महत्वपूर्ण परियोजना का शिलान्यास दिल्ली के कचरा प्रबंधन के लिए एक गेम चेंजर साबित होगा। इन परियोजनाओं के माध्यम से दिल्ली की लैंडफिल साइटों पर दबाव कम होगा, प्रदूषण में कमी आएगी और पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ेगी।