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दिल्ली सरकार ने राजधानी में प्रदूषण के स्तर को नियंत्रित करने के लिए एक नई समिति का गठन किया है, जिसका नेतृत्व मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता करेंगी। इस समिति में दिल्ली कैबिनेट के मंत्री, सरकारी विभागों के अधिकारी, विशेषज्ञ और वैज्ञानिक शामिल होंगे। यह कदम दिल्ली में वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने और उसे कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण है।
प्रदूषण पर कड़ा नियंत्रण
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में गठित की गई इस नई समिति का उद्देश्य प्रदूषण फैलाने वाले व्यक्तियों, संस्थाओं और उद्योगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करना है। सभी विभागों को आदेश दिया गया है कि प्रदूषण से संबंधित किसी भी नियम का उल्लंघन होने पर जुर्माना लगाया जाए, चाहे वह निजी हो या सरकारी संस्थाओं से संबंधित हो।
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दिल्ली की हवा की गुणवत्ता: ‘बहुत खराब’ श्रेणी में बनी रही
दिल्ली की हवा की गुणवत्ता बुधवार को लगातार तीसरे दिन ‘बहुत खराब’ श्रेणी में रही। सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के अनुसार, वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) शाम 5:30 बजे तक 333 दर्ज किया गया। नेहरू नगर में AQI सबसे अधिक 388 था, जबकि मंदिर मार्ग पर यह 236 था। यह स्थिति दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण के संकेत हैं, जिन पर तत्काल नियंत्रण की आवश्यकता है।
केंद्र सरकार का कड़ा रुख
केंद्र सरकार ने दिल्ली-एनसीआर के उद्योगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का निर्देश दिया है। 31 दिसंबर तक रियल-टाइम उत्सर्जन निगरानी प्रणाली (Real-Time Emission Monitoring Systems) और वायु प्रदूषण नियंत्रण उपकरण (Air Pollution Control Devices) लागू न करने वाले उद्योगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
केंद्र ने साथ ही यह भी आदेश दिया है कि दिल्ली-एनसीआर राज्यों को अगले महीने तक 2026 के लिए अपने वायु प्रदूषण नियंत्रण योजनाओं को अंतिम रूप देना होगा। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के चेयरमैन वीर विक्रम यादव ने बताया कि दिल्ली-एनसीआर में 2,254 ऐसे बड़े उद्योग हैं जिन्होंने अभी तक अपनी उत्सर्जन प्रणाली को CPCB सर्वर से नहीं जोड़ा है। इन उद्योगों को चेतावनी दी गई है कि अगर 31 दिसंबर तक वे अपने सिस्टम को सही नहीं करते, तो उन पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी, जिसमें उद्योगों को बंद करने का आदेश भी शामिल हो सकता है।
सुप्रीम कोर्ट की निगरानी
दिल्ली हाई कोर्ट ने प्रदूषण नियंत्रण से संबंधित एक याचिका पर सुनवाई करते हुए याचिकाकर्ता को सुप्रीम कोर्ट जाने की सलाह दी है। कोर्ट ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट पहले से ही दिल्ली की वायु गुणवत्ता के मुद्दे पर निगरानी रख रहा है और इस विषय पर कई आदेश जारी किए हैं।