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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सिंगापुर यात्रा पर हैं, जिसका मुख्य उद्देश्य भारत और सिंगापुर के बीच आर्थिक सहयोग, निवेश और संस्थागत साझेदारी को और मजबूत करना है। इस दौरान मुख्यमंत्री उच्चस्तरीय बैठकें करेंगे और प्रमुख निवेशकों के साथ संवाद करेंगे।
सीएम योगी 24 फरवरी तक सिंगापुर में रहेंगे। उनका यह दौरा भारत-सिंगापुर व्यापक रणनीतिक साझेदारी रोडमैप के अनुरूप है, जिसमें आर्थिक सहयोग, डिजिटलाइजेशन, कौशल विकास, सतत विकास, कनेक्टिविटी और उन्नत विनिर्माण को प्राथमिकता दी गई है। हरित ऊर्जा और औद्योगिक विकास के क्षेत्रों में निवेश की संभावनाओं पर भी चर्चा की जाएगी। वित्तीय वर्ष 2024-25 में सिंगापुर से भारत को 14.94 अरब अमेरिकी डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश प्राप्त हुआ है।
यह यात्रा उत्तर प्रदेश को वैश्विक निवेश के लिए एक प्रतिस्पर्धी, भरोसेमंद और दीर्घकालिक निवेश गंतव्य के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
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सिंगापुर के शीर्ष राजनीतिक नेतृत्व के साथ बैठकें
मुख्यमंत्री सिंगापुर के राष्ट्रपति थर्मन शनमुगारत्नम, प्रधानमंत्री लॉरेंस वोंग, विदेश मंत्री विवियन बालाकृष्णन और मानव संसाधन, ऊर्जा व विज्ञान प्रौद्योगिकी के मंत्रियों के साथ उच्चस्तरीय बैठकें करेंगे। इन बैठकों में भारत-सिंगापुर के सहयोग ढांचे को उत्तर प्रदेश में निवेश और परियोजना आधारित साझेदारी में बदलने पर चर्चा होगी।
निवेशकों और उद्योग प्रतिनिधियों के साथ संवाद
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सिंगापुर में प्रमुख और संस्थागत निवेशकों के साथ भी बैठक करेंगे। इनमें तामसेक और जीआइसी जैसी प्रतिष्ठित संस्थाएं शामिल हैं। इसके अलावा डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर, लॉजिस्टिक्स, एविएशन सेवाएं, वित्तीय सेवाएं और उन्नत विनिर्माण क्षेत्रों के उद्योग प्रतिनिधियों के साथ भी विचार-विमर्श किया जाएगा।
उत्तर प्रदेश नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (जेवर) के पास भूमि पार्सलों को एआई आधारित डिजिटल और डेटा इन्फ्रास्ट्रक्चर निवेश के लिए प्रस्तुत किया जा रहा है। सिंगापुर की कंपनियां भारत में विशेष रूप से एआई सक्षम डिजिटल कैंपस के क्षेत्र में बहुवर्षीय विस्तार की योजना बना रही हैं।
इन्वेस्ट यूपी मेगा रोड-शो
सिंगापुर यात्रा का समापन ‘इन्वेस्ट यूपी मेगा रोडशो’ के साथ होगा, जिसमें डेटा सेंटर संचालक, लॉजिस्टिक्स और इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपर, नवीकरणीय ऊर्जा कंपनियां, प्राइवेट इक्विटी फंड और संप्रभु संपत्ति कोष शामिल होंगे। इसका उद्देश्य उत्तर प्रदेश को भारत के भीतर प्रतिस्पर्धी, विस्तार योग्य और निवेश-अनुकूल गंतव्य के रूप में स्थापित करना है।