मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ: यह कदम राज्य सरकार और जनता के बीच रिश्ते को और मजबूत करेगा और आम लोगों का शासन प्रशासन पर भरोसा बढ़ेगा।
आम जनता की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक ऐतिहासिक निर्णय लिया है। सांसदों, विधायकों और अन्य जनप्रतिनिधियों के पत्रों को अनदेखा करने वाले कर्मचारियों और अधिकारियों पर अब कड़ी कार्रवाई होगी। योगी सरकार ने पहली बार ऐसी कठोर व्यवस्था लागू की है जिससे कोई भी विभाग आम लोगों को नजरअंदाज नहीं कर सकेगा।
संसदीय कार्य विभाग ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर सभी प्रमुख सचिवों, डीजीपी, मंडलायुक्तों, विभागाध्यक्षों, जिलाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों को इस संबंध में आदेश दिया है। निर्देश में कहा गया है कि हर सरकारी कार्यालय में “जनप्रतिनिधि पत्राचार रजिस्टर” होना चाहिए। इसमें विधायकों, सांसदों और अन्य जनप्रतिनिधियों से प्राप्त पत्रों का पूरा विवरण होना चाहिए।
साथ ही, पत्र मिलते ही संबंधित अधिकारी को न केवल तत्काल कार्रवाई करनी होगी, बल्कि मामले की प्रगति से जनप्रतिनिधि को तुरंत अवगत कराना होगा। इससे जनप्रतिनिधियों को एक ही मामले में बार-बार पत्राचार करने की आवश्यकता नहीं होगी।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट रूप से कहा कि जनता की समस्याओं पर कोई लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जनप्रतिनिधियों के पत्रों को अनदेखा करने वाले अधिकारी या कर्मचारी के खिलाफ कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
शासन में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी
योगी सरकार के इस निर्णय से शासन में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी। यह भी सुनिश्चित करेगा कि आम आदमी की समस्याओं का त्वरित समाधान होगा।
योगी सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में जनता से सीधे संवाद करने और उनकी समस्याओं को हल करने पर बल दिया है। जैसे, जनता दर्शन कार्यक्रमों में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद जनता से मिलते हैं और समस्याओं को सुनते हैं और अधिकारियों को तुरंत कार्रवाई करने के लिए कहते हैं। अब इस कड़ी में यह नया प्रणाली लागू की गई है, जिससे जनप्रतिनिधियों द्वारा उठाई गई जनता की आवाज को तुरंत सुन और उनके मुद्दों को हल करने की क्षमता मिलेगी।
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