मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि शेखावाटी क्षेत्र को यमुना जल उपलब्ध कराने के लिए राज्य सरकार को एक गंभीर, बेहतर कार्य योजना और आपसी समन्वय के साथ शीघ्र तैयार की जाए परियोजना की डीपीआर।
मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा ने अधिकारियों को मिशन मोड़ पर काम करने का आदेश दिया, परियोजना की लागत 19 हजार करोड़ रुपये है
मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि यमुना जल समझौता राजस्थान के शेखावाटी क्षेत्र में पर्याप्त जल उपलब्धता की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। इसके धरातल पर उतरने के बाद, इस क्षेत्र को पेयजल और सिंचाई के लिए पर्याप्त जल मिलेगा और जल की समस्या का स्थायी समाधान होगा। उनका कहना था कि पहले राज्य के सीकर, चूरू, झुंझुनंू और अन्य क्षेत्रों में पेयजल और अन्य आवश्यकताओं के लिए जल उपलब्ध हो सकेगा। चूरू और झुंझुनू जिले में सिंचाई सुविधा का निर्माण दूसरे चरण में किया जा सकेगा।
मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा ने पिलानी में केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान में यमुना जल समझौते की प्रगति की समीक्षा की। उनका कहना था कि राज्य सरकार यमुना जल समझौते के तहत नवीन हेड (हथिनीकुण्ड बैराज) से यमुना जल को लाने के लिए प्रवाह प्रणाली कार्य योजना की प्रभावी निगरानी और त्वरित क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के लिए लगी हुई है. इसलिए, जल संसाधन विभाग ने यमुना जल का नवीन पद बनाया है, जो एक अतिरिक्त मुख्य अभियन्ता है।
मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि योजना को लागू करने के लिए संसाधनों की कोई कमी नहीं होगी। उन्होंने अधिकारियों को कहा कि समझौते को पूरा करने के लिए मिशन मोड पर काम करते हुए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट शीघ्र बनाई जाए। उनका कहना था कि परियोजना के कार्यों में अंतर्राष्ट्रीय मानकों का पालन किया जाएगा। शीर्ष तकनीकी संस्थाओं जैसे बिट्स पिलानी और आईआईटी भी इसमें शामिल होंगे।
मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि बेहतर कार्य योजना के साथ-साथ आपसी सहयोग और समन्वय के साथ डीपीआर बनाने का कार्य शीघ्र पूरा होगा। मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा को बैठक में अधिकारियों ने बताया कि हरियाणा और राजस्थान की टास्क फोर्स की पहली संयुक्त बैठक 07 अप्रेल को यमुनानगर (हरियाणा) में हुई थी. इस बैठक में प्राथमिक रूप से अलाईनमेंट के क्रम में वास्तविक धरातलीय परीक्षणों की चर्चा हुई, साथ ही हथिनी कुंड बैराज से यमुना जल लाने के लिए चार वैकल्पिक प्रवाह योजनाओं की चर्चा हुई। केंद्रीय जल आयोग द्वारा सुझाए गए तीन पाईपलाइनों का विकल्प, जो 253 किलोमीटर लंबा था, सबसे अच्छा था। हरियाणा के अधिकारियों के सहयोग से इसका धरातलीय परीक्षण किया जाएगा। इस परियोजना को लगभग 19 हजार करोड़ रुपये की लागत होगी।
उल्लेखनीय है कि 1994 में नई दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और राजस्थान के बीच हुए यमुना जल समझौते के अनुसार, राजस्थान को ताजेवाला हैड (हथिनीकुण्ड बैराज) पर मानसून अवधि (जुलाई से अक्टूबर) में 1917 क्यूसेक (वार्षिक 577 एमसीएम) जल मिलेगा। लेकिन पिछले 30 वर्षों से राजस्थान में आवंटित जल को लाने में बाधा रही है। सीकर, झुंझुनुं और चुरू जिलों की वर्षों पुरानी मांग को पूरा करने के लिए मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा के अथक प्रयासों, केंद्र सरकार के सकारात्मक सहयोग और केन्द्रीय जल आयोग के हस्तक्षेप से यह बाधा दूर हुई. 17 फरवरी, 2024 को राजस्थान और हरियाणा के मुख्यमन्त्रियों और केन्द्रीय जलशक्ति मंत्री की उपस्थिति में समझौता हुआ।
जल संसाधन मंत्री श्री सुरेश सिंह रावत, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री श्री अविनाश गहलोत, नगरीय विकास एवं स्वायत्त शासन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री झाबर सिंह खर्रा, अतिरिक्त मुख्य सचिव जल संसाधन श्री अभय कुमार, हरियाणा के यमुना बैराज के मुख्य अभियंता, हथिनी कुंड बैराज के अधीक्षण अभियंता और हिसार के अधीक्षण अभियंता इस बैठक में उपस्थित थे
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