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नई स्टडी में सामने आया है कि शंख बजाना स्लीप एपनिया के लक्षणों को कम करने में मदद कर सकता है। यह अभ्यास फेफड़ों की क्षमता बढ़ाता है और गले की मांसपेशियों को मजबूत करता है, जिससे नींद की गुणवत्ता में सुधार होता है।
स्लीप एपनिया से जूझ रहे लोगों के लिए राहत की खबर है। हाल ही में की गई एक स्टडी में यह सामने आया है कि शंख बजाना – जो भारतीय परंपरा में धार्मिक और आध्यात्मिक प्रतीक माना जाता है – स्लीप एपनिया के लक्षणों को कम करने में मददगार हो सकता है। इस प्राकृतिक उपाय से नींद की गुणवत्ता में सुधार हो सकता है और दिन में थकान जैसे लक्षणों में भी कमी देखी गई है।
क्या होता है स्लीप एपनिया?
स्लीप एपनिया एक स्लीप डिसऑर्डर है जिसमें व्यक्ति की नींद के दौरान सांस बार-बार रुक जाती है। यह इस कारण होता है क्योंकि नींद के समय गले की मांसपेशियां ढीली होकर एयरवेज को ब्लॉक कर देती हैं। इसके चलते व्यक्ति को बार-बार नींद से जागना पड़ता है, जिससे दिन में थकावट, चिड़चिड़ापन, हाई ब्लड प्रेशर और हार्ट डिजीज जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
कैसे मदद करता है शंख बजाना?
नई रिसर्च में बताया गया कि शंख बजाने से फेफड़ों की क्षमता बढ़ती है और गले व जीभ की मांसपेशियां मजबूत होती हैं, जिससे सोते समय एयरवेज ब्लॉक नहीं होते। अध्ययन में शामिल 30 स्लीप एपनिया मरीजों में 34% तक नींद की गुणवत्ता में सुधार देखा गया। इसके अलावा:
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Hypoxia Index में 4.4% की गिरावट दर्ज हुई
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ऑक्सीजन लेवल में सुधार हुआ
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दिन में नींद आना काफी कम हुआ
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फेफड़ों और श्वसन मांसपेशियों की एक्टिविटी बेहतर हुई
क्यों है यह तकनीक खास?
जहां CPAP मशीन (Continuous Positive Airway Pressure) अभी तक स्लीप एपनिया का मुख्य इलाज रही है, वहीं इसकी कीमत और उपयोग में कठिनाई कई लोगों के लिए चुनौती बनती है। ऐसे में शंख बजाना एक कम लागत और नेचुरल उपाय के रूप में उभर कर सामने आ रहा है, जो कि भारत की पारंपरिक जीवनशैली से भी जुड़ा हुआ है।