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बसंत पंचमी 2026: जानें बसंत पंचमी पर पीले और सफेद रंग का महत्व, मां सरस्वती के प्रिय भोग और त्यौहार की विशेष परंपराएं।
बसंत पंचमी 2026: इस साल 1 फरवरी 2026 को मनाई जाएगी। इस दिन सिर्फ पीला रंग ही नहीं, बल्कि सफेद रंग भी खास महत्व रखता है। जानिए क्यों पहना जाता है ये रंग, किस प्रकार का भोग लगाया जाता है और धार्मिक दृष्टि से इसका महत्व।
बसंत पंचमी का महत्व
बसंत पंचमी को ‘श्री पंचमी’ या ‘ज्ञान पंचमी’ के नाम से भी जाना जाता है। यह त्योहार बसंत ऋतु के आगमन का प्रतीक है। बसंत ऋतु को ‘ऋतुराज’ कहा जाता है क्योंकि यह मौसम सुख, समृद्धि और सौंदर्य का संदेश लाता है। इस अवसर पर मां सरस्वती की पूजा विशेष रूप से की जाती है।
बसंत पंचमी पर पीले रंग का महत्व
बसंत के मौसम में खेत और प्रकृति पूरी तरह पीले फूलों से ढक जाते हैं। पीला रंग सकारात्मकता, शुभता और ज्ञान का प्रतीक माना जाता है। यह रंग सूर्य की किरणों की तरह अज्ञानता के अंधकार को दूर करता है और ज्ञान का संचार करता है। धार्मिक दृष्टि से, मां सरस्वती को पीला रंग अत्यंत प्रिय है। यह रंग मन को प्रसन्न और दिमाग को सक्रिय करता है।
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बसंत पंचमी पर सफेद रंग का महत्व
सफेद रंग पवित्रता, शांति और भाईचारे का प्रतीक है। यह मन को शांत रखता है और जीवन में नई शुरुआत का संदेश देता है। धार्मिक दृष्टि से मां सरस्वती को सफेद रंग भी प्रिय है। इस दिन सफेद भोग में मखाने की खीर और बर्फी बनाई जाती है, जो शांति और सकारात्मकता का प्रतीक मानी जाती है।
बसंत पंचमी पर पीला भोग
बसंत पंचमी के अवसर पर पीले रंग के व्यंजन बनाए जाते हैं। इनमें शामिल हैं:
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केसरिया भात
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केसरिया हलवा
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खिचड़ी
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सरसों का साग
ये भोजन ऊर्जा और गर्माहट प्रदान करते हैं और बदलते मौसम में सेहत के लिए लाभकारी होते हैं।
इस तरह, बसंत पंचमी पर पीला और सफेद रंग दोनों का विशेष महत्व है, और मां सरस्वती की पूजा के साथ ये रंग सकारात्मक ऊर्जा और ज्ञान का प्रतीक बनते हैं।