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Delhi Garbage Tax: कूड़ा उठाने के चार्ज को लेकर बहस शांत हो गई है। कांग्रेस अध्यक्ष देवेंद्र यादव ने इसे जनता पर अतिरिक्त बोझ बताया, जबकि बीजेपी प्रवक्ता प्रवीण शंकर कपूर ने AAP पर कड़ा हमला बोला।
Delhi Garbage Tax: दिल्ली में कूड़ा उठाने पर टैक्स का मुद्दा चर्चा का विषय बन गया है। कांग्रेस और BJP में राजनीतिक संघर्ष नगर निगम (MCD) के नवीनतम यूजर चार्ज को लेकर हुआ है। दिल्ली कांग्रेस के अध्यक्ष देवेंद्र यादव ने इसे एक जबरन डाला गया आर्थिक बोझ बताया है, जबकि बीजेपी प्रवक्ता प्रवीण शंकर कपूर ने AAP सरकार की मंशा पर सवाल उठाया है।
प्रयोगकर्ताओं ने दिल्लीवासियों पर अतिरिक्त बोझ डाला: देवेंद्र यादव
दिल्ली नगर निगम के निर्णय पर कांग्रेस अध्यक्ष देवेंद्र यादव ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उनका कहना है कि दिल्लीवासी पहले से ही संपत्ति टैक्स चुका रहे हैं, और अब कूड़ा उठाने के नाम पर एक अतिरिक्त टैक्स लगाना अन्यायपूर्ण और गलत है।
क्या है ये यूजर चार्ज?
देवेंद्र यादव ने बताया कि MCD ने नया नियम बनाया है, जिसके तहत रिहायशी इलाकों में रहने वालों को कूड़ा प्रबंधन के लिए प्रति महीने 50 से 200 रुपये देने होंगे। 50 वर्ग मीटर तक की जगह पर 50 रुपये महीने देना होगा; 50 से 200 वर्ग मीटर की जगह पर 100 रुपये; और 200 वर्ग मीटर से अधिक की जगह पर 200 रुपये महीने देना होगा। यानी एक वर्ष में कम से कम 600 रुपये और अधिक से अधिक 2400 रुपये का अतिरिक्त खर्च। स्ट्रीट वेंडर्स से भी हर महीने सौ रुपये लिए जाएंगे। यादव ने कहा कि पहले ये चार्ज सिर्फ दुकानों और कमर्शियल स्थानों से लिया जाता था, लेकिन अब घरों पर भी किया जाता है।
उन्होंने पूछा, “जब 80% घरों से अभी तक ढंग से कूड़ा उठाया नहीं जाता, तो फिर किस बात का चार्ज?”।साथ ही, उन्होंने इसे बीजेपी और AAP के सहयोग से हुआ बताया। कांग्रेस इस यूजर चार्ज का सख्त विरोध करती है, जैसा कि देवेंद्र यादव ने स्पष्ट रूप से कहा। उनका कहना है कि कूड़ा चार्ज को संपत्ति टैक्स के साथ जोड़ना गलत है और इसे जल्द ही वापस लिया जाना चाहिए। उन्हें दिल्लीवासियों से अपील की कि वे इस अन्याय के खिलाफ आवाज उठाएं।
कांग्रेस ने फैसला वापस लिया
कांग्रेस इस फैसले का कट्टर विरोध करेगी और इसे वापस लेने की मांग करेगी, देवेंद्र यादव ने घोषणा की। उन्हें इस अन्याय के खिलाफ जनता से भी आवाज उठाने की अपील की।
बीजेपी प्रवक्ता प्रवीण शंकर कपूर ने आम आदमी पार्टी (AAP) और दिल्ली नगर निगम (MCD) के मेयर महेश कुमार को घेर लिया है। उनका कहना था कि अगर AAP की मेयर वास्तव में इस चार्ज के खिलाफ थीं, तो उन्होंने निगम की बैठक बुलाई होती। निगमायुक्त को चार्ज करने से रोकने का आदेश क्यों नहीं दिया गया?
प्रवीण शंकर कपूर ने मेयर को घेर लिया
कपूर ने बताया कि पूर्वी दिल्ली नगर निगम के आयुक्त ने 2021 में ऐसा ही चार्ज लगाने का प्रयास किया था, लेकिन बीजेपी के मेयर ने इसे तुरंत रोक दिया था। लेकिन अभी AAP के मेयर केवल बयानबाजी कर रहे हैं और कोई कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। कपूर ने कहा, “मेयर साहब को जवाब देना चाहिए कि वह इस चार्ज को रोकने के लिए कुछ क्यों नहीं कर रहे हैं।” बात करने से क्या होगा?”
जबकि 75% लोग निजी सफाई पर निर्भर हैं, तो नए टैक्स क्यों? – कपूर प्रवीण शंकर कपूर ने कहा कि दिल्ली में अधिकांश लोग पहले से ही प्राइवेट सफाईकर्मियों से 50 से 100 रुपये देकर कूड़ा उठाते हैं। ऐसे में, नागरिक अपनी स्वच्छता व्यवस्था खुद संभाल रहे हैं, तो MCD का नया शुल्क अनिवार्य और अनुचित है।
उनका प्रश्न था कि घरों की संस्थाओं से भी टैक्स क्यों लिया जाएगा, जो खुद अपने कूड़े की व्यवस्था करते हैं?
दोनों पक्षों द्वारा एक-दूसरे पर आरोप लगाना
देवेंद्र यादव ने कहा कि यह AAP और बीजेपी की मिलीभगत का परिणाम था, लेकिन प्रवीण शंकर कपूर ने कहा कि यह AAP की साजिश थी। यादव ने कहा कि अगर मेयर इस निर्णय से असहमत हैं, तो वे इस्तीफा क्यों नहीं देते? उन्हें याद दिलाया कि 2018 में बीजेपी की सरकार थी जब ये चार्ज केवल कमर्शियल क्षेत्रों पर लागू हुए। बीजेपी चुप है, AAP इसे आम लोगों पर डाल रही है।
साथ ही, कपूर ने कहा कि AAP की सरकार ने बिना किसी बातचीत या तैयारी के लोगों पर बोझ डाला है। MCD को पहले व्यापारियों, आरडब्ल्यूए और घरों की संस्थाओं से सलाह लेनी चाहिए थी।
MCD और मेयर अब दिल्ली की नजरें हैं
AAP सरकार को कांग्रेस और बीजेपी ने यूजर चार्ज को लेकर घेर लिया है, जबकि मेयर की भूमिका भी चर्चा में है। क्या दिल्लीवासियों को एक नया बोझ उठाना पड़ेगा या मेयर इस निर्णय को रोक देंगे? आने वाले दिनों में यह स्पष्ट हो जाएगा।
क्या पूरा मुद्दा है?
दिल्ली नगर निगम ने हाल ही में निर्णय लिया है कि घरों, दुकानों और बिजनेस वाली जगहों से कूड़ा उठाने के लिए लोगों से शुल्क लिया जाएगा। बीजेपी का कहना है कि ये फैसले बिना तैयारी और आम सहमति के गलत हैं। अब देखना है कि मेयर इस पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं और क्या MCD इस भुगतान को लागू करता है। फिलहाल, बीजेपी ने इसे एक प्रमुख मुद्दा बनाया है।
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