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Tirupati Balaji Temple: तिरुपति बालाजी मंदिर, जो भगवान विष्णु के अवतार श्री वेंकटेश्वर स्वामी को समर्पित है, न केवल आस्था का केंद्र है बल्कि यह एक रहस्यमयी मंदिर भी है। यह मंदिर आंध्र प्रदेश के तिरुमाला में स्थित है और इसके बारे में कई अनसुने रहस्य हैं, जिन्हें जानकर आप हैरान रह जाएंगे। इस लेख में हम तिरुपति बालाजी मंदिर के पांच रहस्यों के बारे में बताएंगे जो आपके ज्ञान को बढ़ाएंगे।
1. बाल दान की परंपरा
तिरुपति बालाजी मंदिर में एक अनोखी परंपरा है, जिसे बाल दान कहा जाता है। यह परंपरा सदियों से चली आ रही है और इसमें भक्त अपने बाल भगवान को अर्पित करते हैं। मान्यता है कि भगवान विष्णु ने कुबेर देव से कर्ज लिया था और वह यह कर्ज कलयुग के अंत तक चुकाएंगे। भक्तों का मानना है कि जब उनकी मनोकामना पूरी होती है, तो वे बाल दान करते हैं, जो कर्ज की किस्त के रूप में देखा जाता है।
2. भगवान को स्त्री और पुरुष के वस्त्र पहनाए जाते हैं
तिरुपति बालाजी मंदिर की प्रतिमा का रहस्य भी बहुत दिलचस्प है। मान्यता है कि इस प्रतिमा के पीछे हमेशा समुद्र की लहरों की आवाज सुनाई देती है, जिसे कुछ भक्तों ने अनुभव भी किया है। इसके अलावा, मंदिर में भगवान वेंकटेश्वर स्वामी की प्रतिमा को स्त्री और पुरुष दोनों प्रकार के वस्त्र पहनाए जाते हैं। यह माना जाता है कि प्रतिमा में भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी दोनों का रूप समाहित है।
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3. प्रतीमा के बाल हैं असली
तिरुपति बालाजी मंदिर में भगवान की प्रतिमा पर जो बाल लगे हैं, वे असली और चमकदार होते हैं। जो लोग इस प्रतिमा के पास जाकर इन बालों को देख चुके हैं, वे बताते हैं कि यह बाल कभी उलझते नहीं हैं और हमेशा काले और सुंदर रहते हैं। यह भी एक बड़ा रहस्य है, क्योंकि ये बाल हमेशा उसी अवस्था में रहते हैं।
4. श्री वेंकटेश्वर स्वामी की प्रतिमा पर पसीना आता है
यह एक और चौंकाने वाला रहस्य है कि तिरुपति बालाजी मंदिर में भगवान वेंकटेश्वर स्वामी की प्रतिमा पर पसीना आता है। यह घटना लगातार होती रहती है और इसके साथ ही मंदिर में दीपक जलता रहता है। दिलचस्प बात यह है कि इस दीपक में कोई तेल या घी नहीं डाला जाता, फिर भी वह बिना बुझते जलता रहता है। यह एक रहस्य है जिसे आज तक कोई स्पष्ट रूप से नहीं समझ पाया है।
5. भगवान को दही-चावल का भोग
तिरुपति बालाजी मंदिर में एक खास परंपरा है, जिसमें भगवान वेंकटेश्वर स्वामी को दही-चावल का भोग अर्पित किया जाता है। यह परंपरा एक भक्त की भक्ति के बाद शुरू हुई थी और तब से यह लगातार जारी है। माना जाता है कि दही-चावल का भोग भगवान को अत्यधिक प्रिय है और इसे श्रद्धा से अर्पित किया जाता है।