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उत्तराखंड में मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चाएं तेज हैं। पुराने मंत्रियों के प्रदर्शन पर सवाल उठ रहे हैं, और नवंबर तक बड़ा फैसला होने की संभावना है। जानें विस्तार से संभावित बदलावों के बारे में।
उत्तराखंड में मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर चर्चाएं अब तेज हो गई हैं, और आगामी दिनों में बड़ा निर्णय लिया जा सकता है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सरकार में कुछ मंत्रियों के प्रदर्शन पर सवाल उठने के बाद, राजनीतिक गलियारों में बदलाव की अटकलें बढ़ गई हैं। नवंबर तक मंत्रिमंडल विस्तार के संभावित निर्णय की चर्चा है, जिससे राज्य की राजनीति में नई हलचल देखने को मिल सकती है।
कौन हैं वो मंत्री जो रहे हैं विवादों में?
आखिरी 8 सालों से लगातार मंत्री पद पर काबिज कुछ नेताओं पर सवाल उठाए जा रहे हैं। इनमें प्रमुख नाम हैं – सुबोध उनियाल, सतपाल महाराज, रेखा आर्या, और धन सिंह रावत। ये सभी मंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत और पुष्कर सिंह धामी दोनों सरकारों में महत्वपूर्ण पदों पर रहे हैं। अब यह सवाल उठ रहा है कि इन मंत्रियों की कार्यकाल में क्या विशेष उपलब्धियां रही हैं, जो उनके पदों को बनाए रखने के पक्ष में हो सकती हैं?
क्या पुरानी सरकारों से कोई फर्क आया?
इन चारों मंत्रियों के प्रदर्शन की समीक्षा इस समय एक बड़ा मुद्दा बन चुकी है। उदाहरण के तौर पर, सतपाल महाराज द्वारा पर्यटकों की संख्या में वृद्धि का दावा किया जाता है, लेकिन विपक्ष यह सवाल उठाता है कि पिछले साल की आपदाओं के दौरान हुए नुकसान पर इनका ध्यान क्यों नहीं गया? यही नहीं, अन्य विपक्षी नेताओं का भी मानना है कि इन मंत्रियों की कार्यक्षमता में कोई खास बदलाव नहीं आया है।
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बीजेपी का दावा: मंत्री काम कर रहे हैं बेहतरीन
भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता विपिन कैथल का कहना है कि राज्य के सभी मंत्री बेहतरीन कार्य कर रहे हैं। उनका कहना है कि स्वास्थ्य विभाग में अभूतपूर्व सुधार हुए हैं, और हर जिले में एक मेडिकल कॉलेज स्थापित किया जा रहा है। साथ ही, चार धाम यात्रा को और सुगम बनाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।
क्या उत्तराखंड में गुजरात मॉडल अपनाया जाएगा?
गुजरात में मंत्रिमंडल के इस्तीफे के बाद, उत्तराखंड में भी मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। क्या उत्तराखंड में भी वही मॉडल अपनाया जाएगा, जिसमें पुराने मंत्रियों के स्थान पर नए चेहरे लाए जाएंगे? बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने संकेत दिया है कि नवंबर तक मंत्रिमंडल में विस्तार हो सकता है, हालांकि, इसकी तारीख अभी तक स्पष्ट नहीं है।
मुख्यमंत्री का अधिकार: मंत्रिमंडल विस्तार
मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर आखिरकार निर्णय मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का ही होगा, क्योंकि यह उनके विशेष अधिकार क्षेत्र में आता है। मंत्रिमंडल में बदलाव की प्रक्रिया को लेकर राज्य के राजनीतिक पंडितों की भविष्यवाणियां तेज हो गई हैं, और इसके लिए नवंबर महीने की तारीखें देखी जा रही हैं, क्योंकि 11 नवंबर तक बिहार चुनाव होने हैं।