स्वास्थ्य मंत्री ने युद्ध नशे विरुद्ध अभियान के तहत मोहाली में चिकित्सा अधिकारियों के क्षमता निर्माण प्रशिक्षण का शुभारंभ किया
भगवंत सिंह मान सरकार की पंजाब को नशा मुक्त बनाने की प्रतिबद्धता दोहराई
नशीले पदार्थों के सेवन के रोगियों के उपचार के लिए लिक्विड और ओरल सब्स्टिट्यूशन थेरेपी
एसएएस नगर, 26 अगस्त, 2025:
पंजाब के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने आज भगवंत सिंह मान सरकार के प्रमुख अभियान युद्ध नशे विरुद्ध के तहत क्लस्टर रिसोर्स सेंटर, (अंबेडकर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज) मोहाली में चिकित्सा अधिकारियों के क्षमता निर्माण प्रशिक्षण का उद्घाटन किया।
उन्होंने कहा, “यह प्रशिक्षण कार्यक्रम, अनन्या बिरला फाउंडेशन के सहयोग से एआईएमएस, मोहाली में स्थापित डेटा इंटेलिजेंस एंड टेक्निकल सपोर्ट यूनिट (डीआईटीएसयू) के माध्यम से पंजाब की नशामुक्ति और पुनर्वास सेवाओं को मज़बूत करने की एक व्यापक रणनीति का हिस्सा है। एनडीडीटीसी-एम्स, पीजीआईएमईआर चंडीगढ़, आईआईटी रोपड़ और टीआईएसएस मुंबई सहित प्रमुख राष्ट्रीय संस्थानों द्वारा समर्थित, डीआईटीएसयू राज्य भर में निर्बाध तकनीकी सहायता और ज़मीनी स्तर पर कार्यान्वयन सुनिश्चित करने के लिए हब-एंड-स्पोक मॉडल का काम करता है।
डॉ. बलबीर सिंह ने आगे कहा, “नशे के खिलाफ लड़ाई पंजाब सरकार की प्राथमिकता है। वैज्ञानिक प्रशिक्षण, वास्तविक समय की निगरानी और नशामुक्ति के बुनियादी ढाँचे के विस्तार के माध्यम से, हम उपचार सेवाओं को अधिक सुलभ और रोगी-केंद्रित बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। चिकित्सा अधिकारियों, काउंसलरों, पुलिसकर्मियों और मनोवैज्ञानिकों को प्रभावी, करुणामयी और पेशेवर देखभाल प्रदान करने के कौशल से लैस किया जा रहा है।”
इस पहल के तहत, एम्स में प्रशिक्षित मनोचिकित्सक सैद्धांतिक ज्ञान, व्यावहारिक कौशल और कानूनी जागरूकता को शामिल करते हुए पाँच दिवसीय गहन कार्यक्रम आयोजित कर रहे हैं। इसका उद्देश्य जमीनी स्तर पर मादक द्रव्यों के सेवन संबंधी विकारों के प्रबंधन हेतु चिकित्सा अधिकारियों और संबद्ध कर्मचारियों की क्षमता को बढ़ाना है।
पंजाब के सुदृढ़ नशामुक्ति नेटवर्क पर प्रकाश डालते हुए, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान मंत्री ने कहा कि पूरे पंजाब में 5,000 से अधिक समर्पित नशामुक्ति एवं पुनर्वास इलाज बिस्तर उपलब्ध कराए गए हैं। 36 सरकारी नशामुक्ति केंद्रों, 19 सरकारी पुनर्वास केंद्रों, 143 निजी नशामुक्ति केंद्रों और 72 निजी पुनर्वास केंद्रों में सरकार द्वारा आवास, भोजन और दवाओं सहित निःशुल्क उपचार प्रदान किया जा रहा है।
इसी प्रकार, 10.31 लाख से अधिक पंजीकृत रोगियों वाले 547 ओओएटी (आउटपेशेंट ओपिओइड असिस्टेड ट्रीटमेंट) क्लीनिक पंजाब को नशामुक्त बनाने में योगदान दे रहे हैं।
डॉ. बलबीर सिंह ने आगे कहा कि मेथाडोन क्लीनिकों ने अमृतसर, बठिंडा और कपूरथला में काम शुरू कर दिया गया है, और जालंधर, मोहाली, फरीदकोट और पटियाला में इसका विस्तार किया जा रहा है। इस पद्धति से नशे के आदी लोगों द्वारा सुई के आदान-प्रदान को रोकने में मदद मिलेगी।
मंत्री ने डीडीआरपी (ड्रग डि-एडिक्शन एंड रजिस्ट्री) पोर्टल के माध्यम से वास्तविक समय की निगरानी पर राज्य के फोकस और राज्य स्तरीय रणनीतियों को स्थानीय स्तर पर लागू करने के लिए मोहाली, पटियाला, अमृतसर, जालंधर और फरीदकोट के मेडिकल कॉलेजों में क्लस्टर रिसोर्स सेंटर (सीआरसी) की भागीदारी पर भी प्रकाश डाला।
डॉ. बलबीर सिंह ने चिकित्सा अधिकारियों और विशेषज्ञों की प्रतिबद्धता की सराहना करते हुए कहा कि उनके सामूहिक प्रयास “एक स्वस्थ और नशा मुक्त पंजाब” सुनिश्चित करेंगे।
उपस्थित अधिकारियों में प्रमुख रूप से बसंत गर्ग, सचिव स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, पंजाब, श्रीमती भवनीत भारती, निदेशक प्रिंसिपल अंबेडकर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, मोहाली, नवदीप सैनी, चिकित्सा अधीक्षक (एआईएमएस), सिविल सर्जन डॉ. संगीता जैन और 35 चिकित्सा अधिकारियों का एक बैच शामिल था, जो मास्टर ट्रेनर के रूप में चार मनोचिकित्सकों से प्रशिक्ष
ण प्राप्त कर रहे हैं।