उत्तरकाशी आपदा 2025: भागीरथी में झील से बढ़ा खतरा, 1273 लोग सुरक्षित, रेस्क्यू जारी

उत्तरकाशी आपदा 2025: भागीरथी में झील से बढ़ा खतरा, 1273 लोग सुरक्षित, रेस्क्यू जारी

उत्तरकाशी आपदा 2025: उत्तरकाशी में बादल फटने और भूस्खलन के बाद 1273 लोग सुरक्षित निकाले गए। भागीरथी नदी में बनी झील और खराब मौसम से बचाव कार्यों में बढ़ी मुश्किलें।

उत्तरकाशी आपदा 2025: उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले के धराली क्षेत्र में 5 अगस्त को बादल फटने और भूस्खलन के बाद आई प्राकृतिक आपदा से हालात बेहद गंभीर हो गए हैं। अब तक 1273 से अधिक लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है, लेकिन लगातार हो रही बारिश, खराब मौसम और रास्तों के अवरुद्ध होने से बचाव अभियान में लगातार चुनौतियां आ रही हैं।

भागीरथी नदी में बनी झील बनी नई चिंता

धराली के पास तेलगाड क्षेत्र में भूस्खलन से भागीरथी नदी का जल प्रवाह रुक गया है, जिससे एक प्राकृतिक झील बन गई है। यह झील किसी भी समय खतरा बन सकती है और इसके फटने से नीचे के क्षेत्रों में भारी तबाही की आशंका है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बताया कि भारी मशीनों के न पहुंच पाने के कारण 30 सदस्यीय विशेषज्ञ टीम झील को मैन्युअल रूप से चैनलाइज करेगी, ताकि इसका दबाव कम किया जा सके।

मुख्यमंत्री धामी ने की आपदा प्रबंधन समीक्षा

मुख्यमंत्री धामी ने देहरादून स्थित राज्य आपदा प्रबंधन केंद्र में अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। उन्होंने बताया कि:

  • हमारी प्राथमिकता अधिकतम लोगों की सुरक्षा है।

  • क्षति मूल्यांकन कमेटी गठित की गई है, जो रिपोर्ट के आधार पर मुआवजा तय करेगी।

  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह से निरंतर संपर्क में हैं और केंद्र से हर संभव सहायता मिल रही है।

लापता लोगों की तलाश तेज, रेस्क्यू का दूसरा चरण शुरू

उत्तराखंड पुलिस महानिदेशक (DGP) दीपम सेट के निर्देश पर एसडीआरएफ, आईटीबीपी, सेना, और एनडीआरएफ की टीमें युद्धस्तर पर राहत और बचाव कार्यों में जुटी हैं।

  • IG एसडीआरएफ अरुण मोहन जोशी को इंसिडेंट कमांडर बनाया गया है।

  • कमांडेंट अर्पण यदुवंशी को डिप्टी कमांडर की जिम्मेदारी दी गई है।

  • सर्च एंड रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए तकनीकी संसाधनों और ड्रोन का इस्तेमाल किया जा रहा है।

रास्तों के बंद होने से बचाव कार्यों में बाधा

गंगोत्री हाईवे सहित कई प्रमुख मार्गों के बंद होने से भारी मशीनें घटनास्थल तक नहीं पहुंच पा रही हैं। यही कारण है कि झील को मैन्युअल रूप से चैनलाइज करने का निर्णय लिया गया।

प्रशासन ने हर्षिल, जीएमवीएन और झाला में राहत शिविर स्थापित किए हैं, जहां प्रभावितों को भोजन, चिकित्सा और आश्रय की सुविधाएं दी जा रही हैं।

खतरा अभी टला नहीं, रेस्क्यू ऑपरेशन जारी

उत्तरकाशी आपदा के बाद स्थिति अभी भी गंभीर बनी हुई है। भागीरथी नदी में बनी झील, खराब मौसम और मार्ग अवरोधों ने राहत कार्यों को चुनौतीपूर्ण बना दिया है। सरकार और बचाव एजेंसियां लगातार स्थिति की निगरानी कर रही हैं और प्रभावितों की मदद में जुटी हैं।

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