खनन राजस्व की तिमाही वृद्धि (2022-2025):
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2022-23: ₹146.18 करोड़
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2023-24: ₹177.27 करोड़
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2024-25: ₹270.37 करोड़
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2025-26: ₹331.14 करोड़
यह आँकड़े इस बात का स्पष्ट संकेत हैं कि खनन विभाग की कार्यप्रणाली, पारदर्शिता और टेक्नोलॉजी के प्रयोग ने राज्य की आर्थिक सशक्तता में बड़ी भूमिका निभाई है।
खनन में राजस्व बढ़ोतरी की प्रमुख रणनीतियाँ
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ई-नीलामी के माध्यम से खनिज पट्टों का आवंटन: पूरी प्रक्रिया को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाकर पारदर्शी बनाया गया है, जिससे अधिक कंपनियों की भागीदारी सुनिश्चित हुई है।
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अवैध खनन पर सख्ती: उड़नदस्ते और निरीक्षण टीमें लगातार क्षेत्रों का दौरा कर रही हैं। नियम उल्लंघन पर कड़ा जुर्माना और कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
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Mining Digital Transformation and Surveillance System: पूरे राज्य में 45 माइनिंग चेक पोस्ट स्थापित किए जा रहे हैं। यह चेक पोस्ट डिजिटल निगरानी प्रणाली से लैस होंगे, जिससे अवैध गतिविधियों पर तत्काल कार्रवाई संभव हो सकेगी।
स्थानीय रोजगार और सतत विकास को बढ़ावा
खनन नीति में सुधारों से केवल राजस्व ही नहीं बढ़ा, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी सृजित हुए हैं। देहरादून, हरिद्वार, अल्मोड़ा और नैनीताल जैसे जिलों में नई खनन परियोजनाओं को मंजूरी मिलने से विकास को गति मिली है।
उत्तराखंड सरकार का पारदर्शी और सशक्त प्रशासन
राज्य सरकार द्वारा की गई नीतिगत पहलें न केवल राजस्व में वृद्धि का माध्यम बनी हैं, बल्कि यह बेहतर प्रशासनिक व्यवस्था और पर्यावरण संतुलन का भी प्रमाण हैं। मुख्यमंत्री और खनन विभाग के नेतृत्व में उत्तराखंड अब खनन क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर मिसाल बनता जा रहा है।
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