UP News: गोरखपुर में भी आठ वर्ष से अधिक समय बाद सर्किल रेट बढ़ाने की तैयारी शुरू हो गई है। इस विषय पर सर्वे जारी है।
UP News: आठ साल बाद गोरखपुर में सर्किल रेट बढ़ाने की तैयारी शुरू हो गई है। भूमि और घर खरीदना महंगा हो सकता है, लेकिन बेचने वालों को फायदा होगा। हाल ही में गोरखपुर में सर्किल रेट नहीं बढ़ाया गया है, हालांकि इस दौरान जमीन की कीमतें कई गुना बढ़ी हैं।
शहरों की सीमा से यानी देवरिया, महराजगंज, मऊ और संतकबीरनगर से सटे गांवों की भूमि के सर्किल रेट को जिले के भीतर तहसील सीमा से समान करना महत्वपूर्ण है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी इसे लेकर आदेश दे चुके हैं।
रजिस्ट्री विभाग का कहना है कि प्राय: सीमा से सटे जिलों में भूमि की दरें काफी अलग हैं। विभिन्न सरकारी योजनाओं के लिए समझौते के आधार पर भूमि खरीदने या अनिवार्य अर्जन के दौरान दरें अलग-अलग होने की वजह से मुआवजे की राशि भी अलग-अलग होती है, जिससे प्रभावित काश्तकारों में असंतोष पैदा होता है। यह स्थिति जिले के भीतर दो तहसीलों की सीमा पर स्थित कई गांवों में भी है। पास होने पर भी दरें अलग हैं। नए सर्किल दर को समान बनाने पर जोर है। सर्वे ने भी सभी तहसीलों के उप निबंधकों को इसे सर्वोच्च प्राथमिकता देने के लिए कहा है।
उधर, राज्य के 42 जिलों में सर्किल रेट बढ़ने से यहां के किसानों और काश्तकारों की आशा भी बढ़ गई है। उनका दावा है कि भूमि अधिग्रहण में उन्हें बहुत कम दर पर भुगतान किया जा रहा है क्योंकि भूमि का सर्किल रेट वर्षों से नहीं बढ़ रहा है। अगस्त 2016 के बाद गोरखपुर में सर्किल रेट नहीं बढ़ाया गया है, जबकि भूमि की कीमतों में कई गुना वृद्धि हुई है। सर्किल दरों को लागू करने वाले सामान्य निर्देश में दो महीने पहले जिला प्रशासन ने कुछ बदलाव किए। लेकिन काश्तकारों और किसानों को सर्किल रेट में बदलाव की उम्मीद है।
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