यूपी में अब 150 करोड़ तक की परियोजनाओं को आसानी से मंजूरी मिलेगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वित्तीय स्वीकृति प्रक्रिया तेज और पारदर्शी बनाने, वार्षिक कार्य योजना समय पर स्वीकृत कराने और डिजिटल सुधार लागू करने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश में परियोजनाओं की वित्तीय स्वीकृति प्रक्रिया को और तेज़, सरल और पारदर्शी बनाने के लिए महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि अब विभागीय मंत्री स्तर से स्वीकृति की सीमा 50 करोड़ रुपये तक बढ़ाई जाए। इसके अलावा 50 से 150 करोड़ रुपये तक की परियोजनाओं की मंजूरी वित्त मंत्री स्तर से और 150 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली परियोजनाओं की स्वीकृति मुख्यमंत्री स्तर से दी जाएगी, ताकि परियोजनाओं को समय पर वित्तीय मंजूरी मिल सके और उनका कार्य तेजी से आगे बढ़े।
वार्षिक कार्य योजना 15 अप्रैल तक स्वीकृत कराना अनिवार्य
मुख्यमंत्री ने सभी विभागों को निर्देश दिया है कि वे अपनी वार्षिक कार्य योजना 15 अप्रैल 2026 तक हर हाल में स्वीकृत कराएँ। जो विभाग इस समयसीमा का पालन नहीं करेंगे, उनकी सूची सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय को भेजी जाएगी। साथ ही, किसी परियोजना की लागत में 15% से अधिक वृद्धि होने पर विभाग को कारण सहित पुनः अनुमोदन लेना अनिवार्य होगा।
वित्त विभाग की समीक्षा में उठाए गए कदम
सीएम योगी ने शुक्रवार, 30 जनवरी 2026 को वित्त विभाग की विस्तृत समीक्षा की। बैठक में राज्य की राजकोषीय स्थिति, बजट प्रबंधन, पूंजीगत व्यय, निर्माण कार्यों की व्यवस्था, डिजिटल वित्तीय सुधार, पेंशन प्रणाली और विभागीय नवाचार पर विस्तार से चर्चा की गई।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश को सुदृढ़, पारदर्शी और रिजल्ट ओरिएंटेड वित्तीय प्रबंधन वाला आदर्श राज्य बनाना है। इसके लिए सभी विभाग समयबद्धता, गुणवत्ता, पारदर्शिता और डिजिटल प्रक्रियाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता दें। उन्होंने राज्य गारंटी पॉलिसी लागू करने का भी निर्देश दिया।
also read: उत्तर प्रदेश सरकार जल्द शिक्षकों को देगी कैशलेस इलाज की…
2023-24 में प्रदेश का रिकॉर्ड पूंजीगत व्यय
बैठक में बताया गया कि साल 2023-24 में उत्तर प्रदेश का पूंजीगत व्यय 1,10,555 करोड़ रुपये था, जो देश में सबसे अधिक रहा। राज्य ने जितना शुद्ध लोक ऋण लिया, उससे अधिक राशि पूंजीगत कार्यों पर खर्च की, जो वित्तीय अनुशासन का मजबूत संकेत है। कुल व्यय का 9.39% निवेश पर खर्च कर राज्य देश में पहले स्थान पर रहा।
राज्य का राजकोषीय घाटा, राजस्व घाटा और जीएसडीपी अनुपात एफआरबीएम मानकों के अनुरूप रहे। नीति आयोग के अनुसार, कंपोजिट फिस्कल हेल्थ इंडेक्स 2014 में 37 से बढ़कर 2023 में 45.9 हो गया है और उत्तर प्रदेश फ्रंट रनर श्रेणी में पहले स्थान पर है।
राजस्व और विकास व्यय में प्रदेश का योगदान
आरबीआई की रिपोर्ट में राज्य का अपना कर राजस्व 11.6% राष्ट्रीय हिस्सेदारी के साथ देश में दूसरे स्थान पर रहा। विकास व्यय (जीएसडीपी अनुपात में) राष्ट्रीय औसत से लगातार अधिक रहा है, और स्वास्थ्य व्यय में भी उत्तर प्रदेश शीर्ष राज्यों में शामिल है।
डिजिटल वित्तीय सुधार और नवाचार
वित्त विभाग ने पिछले तीन वर्षों में कई सुधार किए हैं:
-
ऑनलाइन बजट मॉड्यूल और वेंडर मैनेजमेंट सिस्टम
-
साइबर ट्रेजरी के माध्यम से पेपरलेस बिल प्रेषण
-
जीपीएफ अनियमितताओं की रोकथाम और ऑनलाइन स्लिप उपलब्ध कराना
सभी कोषागार सुधार अप्रैल 2026 तक पूर्ण किए जाएंगे।
फर्म्स, सोसाइटी और चिट्स विभाग ने अपनी प्रमुख सेवाओं को डिजिटल किया और पुराने अभिलेख डिजिटल किए। ‘सादर’ पोर्टल और नीति आयोग के ‘दर्पण’ पोर्टल के साथ एकीकरण के माध्यम से जनता को अभिलेखों तक आसान पहुंच मिली है।
निर्माण गुणवत्ता और रखरखाव में सुधार
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि सभी नए सरकारी भवनों में 5 साल का भुगतान-आधारित अनुरक्षण अनिवार्य किया जाए। पुराने भवनों के रखरखाव के लिए कॉर्पस फंड बनाया जाएगा। निर्माण गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए थर्ड पार्टी क्वालिटी ऑडिट आईआईटी, एनआईटी और सरकारी तकनीकी संस्थानों से कराया जाएगा।
यूपी ने वित्तीय अनुशासन में देश में नया मानक स्थापित किया
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश ने पूंजीगत व्यय, राजस्व संवर्धन और वित्तीय अनुशासन में देश में नया मानक स्थापित किया है। अब लक्ष्य है कि खर्च की गुणवत्ता और डिजिटल पारदर्शिता को और मजबूत किया जाए और राज्य को भारत का सबसे सक्षम वित्तीय प्रशासन वाला राज्य बनाया जाए।