दिल्ली विधानसभा में फिर हंगामा, ‘फांसी घर’ को लेकर मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने FIR की मांग, AAP ने जताई आपत्ति

दिल्ली विधानसभा में फिर हंगामा, ‘फांसी घर’ को लेकर मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने FIR की मांग, AAP ने जताई आपत्ति

दिल्ली विधानसभा में ब्रिटिश कालीन ‘फांसी घर’ विवाद पर फिर हंगामा, मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने FIR दर्ज कराने और झूठे बोर्ड हटाने की मांग की। AAP ने अपने बचाव में ऐतिहासिक प्रमाणों का हवाला दिया। जानिए पूरी खबर।

राजधानी दिल्ली विधानसभा में ब्रिटिश कालीन ‘फांसी घर’ को लेकर जोरदार विवाद और हंगामा देखने को मिला। विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने 1911 के आधिकारिक नक्शे का हवाला देते हुए कहा कि जिसे ‘फांसी घर’ बताया गया वह असल में अंग्रेजों के जमाने का ‘टिफिन रूम’ और ‘लिफ्ट रूम’ था। उन्होंने दावा किया कि इस बात का कोई ऐतिहासिक प्रमाण नहीं है कि विधानसभा परिसर में फांसी घर था।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने की FIR दर्ज कराने और बोर्ड हटाने की मांग

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इस मामले को जनता की भावनाओं के साथ खिलवाड़ बताया और आरोप लगाया कि साल 2022 में आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार ने इस इमारत का उद्घाटन ‘फांसी घर’ के रूप में किया और 1 करोड़ 4 लाख रुपये खर्च किए। उन्होंने दोषियों पर FIR दर्ज करने और झूठे ‘फांसी घर’ के बोर्ड को 24 अगस्त से पहले हटाने की मांग की। 24 अगस्त को दिल्ली में ऑल इंडिया स्पीकर कॉन्फ्रेंस आयोजित की जाएगी, इसलिए यह कदम महत्वपूर्ण है।

विपक्ष और BJP का आरोप, AAP ने किया कड़ा जवाब

बीजेपी ने AAP पर जनता को गुमराह करने का आरोप लगाया और मामले की गहन जांच की मांग की। वहीं, दिल्ली विधानसभा में विपक्ष के नेता मनजिंदर सिंह सिरसा ने पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर तीखा हमला करते हुए कहा कि ‘ढाई फीट की जगह को फांसी घर बता देना मूर्खता है’। इस दौरान AAP विधायकों ने विरोध किया, जिसके कारण विपक्ष के कई सदस्यों को सदन से बाहर कर दिया गया।

AAP विधायक संजीव झा ने इस विवाद पर कहा कि कई ऐतिहासिक घटनाओं का दस्तावेजीकरण नहीं होता लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि वे झूठी हैं। उन्होंने फांसी घर में मिले रस्सी, कांच के टुकड़े और अन्य वस्तुओं का हवाला देते हुए दावा किया कि अंग्रेजों द्वारा फांसी के बाद ऐसे हथकंडे अपनाए जाते थे, जो भगत सिंह पर लिखी किताबों में भी दर्ज हैं।

विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने किया सफाई

विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि नेशनल आर्काइव्स, IGNCA और ICHR जैसे संस्थानों के एक्सपर्ट्स की राय लेने के बाद ही उन्होंने सदन को 1911 के नक्शे की जानकारी दी। उन्होंने स्वीकार किया कि 2022 में स्वयं भी इस जगह को ‘फांसी घर’ माना गया था लेकिन अब जब वास्तविक नक्शा सामने आया है तो सत्य भी सामने आ गया है।

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