उत्तराखंड में स्वतंत्रता सेनानी उत्तराधिकारी प्रमाण पत्र फर्जीवाड़े की एसआईटी जांच होगी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मेडिकल दाखिलों और आरक्षण में हो रहे दुरुपयोग पर कड़ा कदम उठाते हुए आदेश जारी किए हैं।
उत्तराखंड सरकार अब स्वतंत्रता सेनानी उत्तराधिकारी प्रमाण पत्र में हो रहे फर्जीवाड़े पर कड़ा रुख अपनाने जा रही है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य में फर्जी प्रमाणपत्रों के ज़रिए आरक्षण और मेडिकल दाखिलों में हो रही धांधली की एसआईटी जांच कराने के निर्देश मुख्य सचिव को जारी किए हैं।
फर्जीवाड़े से हो रही आरक्षण नीति की अवहेलना
राज्य में स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की प्रथम पीढ़ी के उत्तराधिकारियों को कॉलेजों में प्रवेश और सरकारी नौकरियों में 2% आरक्षण का प्रावधान है। लेकिन बीते कुछ वर्षों में यह पाया गया है कि कई लोग इस योजना का दुरुपयोग कर रहे हैं। स्वतंत्रता सेनानी उत्तराधिकारी परिवार समिति द्वारा मुख्यमंत्री को दिए गए ज्ञापन में खुलासा हुआ कि कई आवेदकों ने फर्जी दस्तावेज़ों के आधार पर फ्रीडम फाइटर सर्टिफिकेट बनवाकर इसका इस्तेमाल नीट और अन्य शैक्षिक परीक्षाओं में किया है।
मेडिकल प्रवेशों की एसआईटी जांच के आदेश
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि बीते 5 वर्षों में जिन छात्रों ने स्वतंत्रता सेनानी उत्तराधिकारी प्रमाण पत्र के आधार पर मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश लिया है, उनकी एसआईटी (Special Investigation Team) द्वारा गहन जांच की जाएगी। जांच में यह देखा जाएगा कि:
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प्रमाण पत्र किन दस्तावेजों के आधार पर बनाए गए?
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आवेदक वास्तव में सेनानी परिवार से संबंधित हैं या नहीं?
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फर्जी प्रमाण पत्र से कितनों ने आरक्षण का लाभ उठाया?
कई छात्रों के MBBS प्रवेश हो चुके हैं निरस्त
देशभर में ऐसे कई केस सामने आ चुके हैं, जहां फर्जी सर्टिफिकेट के आधार पर मेडिकल कॉलेजों में एडमिशन लेने वाले छात्रों का प्रवेश निरस्त किया गया है। उत्तराखंड में अब इस मामले को गंभीरता से लिया जा रहा है ताकि आरक्षण प्रणाली की पारदर्शिता और योग्य छात्रों के हक़ की रक्षा हो सके।