टाटा मोटर्स सेंसेक्स से बाहर होने की कगार पर, दिसंबर में हो सकता है बड़ा फैसला

टाटा मोटर्स सेंसेक्स से बाहर होने की कगार पर, दिसंबर में हो सकता है बड़ा फैसला

टाटा मोटर्स सेंसेक्स से बाहर होने की कगार पर, दिसंबर में हो सकता है बड़ा फैसला। डीमार्जर के बाद मार्केट कैप में गिरावट, इंडिगो बन सकती है सेंसेक्स में जगह। जानें पूरा असर और कारण।

टाटा मोटर्स (Tata Motors) सेंसेक्स के टॉप-30 शेयरों से बाहर होने की स्थिति में पहुंच गई है। यह कदम अक्टूबर में कंपनी द्वारा अपने कमर्शियल और पैसेंजर व्हीकल बिजनेस को अलग-अलग कंपनी में बदलने के बाद आया। इस डीमार्जर (de-merger) के बाद टाटा मोटर्स का मार्केट कैप गिरकर कम हो गया है, जिससे इसका सेंसेक्स में स्थान जोखिम में है।

इंडिगो बन सकती है टाटा मोटर्स की जगह

अगर टाटा मोटर्स को सेंसेक्स से हटाया गया, तो इसकी जगह देश की प्रमुख एयरलाइन इंडिगो (IndiGo) की पैरेंट कंपनी इंटरग्लोब एविएशन (InterGlobe Aviation) ले सकती है। डीमार्जर के बाद टाटा मोटर्स के कमर्शियल व्हीकल बिजनेस का मार्केट कैप 1.19 ट्रिलियन रुपये और पैसेंजर व्हीकल का 1.37 ट्रिलियन रुपये रह गया, जबकि इंडिगो का मार्केट कैप 2.27 ट्रिलियन रुपये तक पहुंच चुका है।

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सेंसेक्स का लंबा जुड़ाव

टाटा मोटर्स सेंसेक्स का पुराना सदस्य है और 1986 से इंडेक्स का हिस्सा रहा है। हालांकि, 2019 और 2022 में इसे सेंसेक्स से हटाया गया था, बाद में फिर शामिल किया गया। सेंसेक्स की शुरुआत 1 जनवरी, 1986 को हुई थी, और शुरुआती 30 स्टॉक्स में से आज केवल रिलायंस इंडस्ट्रीज, हिंदुस्तान यूनिलीवर और ITC स्थायी रूप से जुड़े हैं।

इंडेक्स से हटने का असर

टाटा मोटर्स के सेंसेक्स से हटने की स्थिति में शॉर्ट टर्म में 2,232 करोड़ रुपये का आउटफ्लो हो सकता है। वहीं, इंडिगो में लगभग 3,157 करोड़ रुपये का इनफ्लो आने की संभावना है। इसके अलावा, ग्रासिम इंडस्ट्रीज (Grasim Industries) भी सेंसेक्स में शामिल हो सकती है, जिससे इसमें 2,526 करोड़ रुपये का पैसिव इनफ्लो देखने को मिल सकता है।

कैसे तय होती हैं सेंसेक्स की कंपनियां

सेंसेक्स में आमतौर पर 13 सेक्टर की कंपनियों को उनके मार्केट कैप के आधार पर चुना जाता है। इंडेक्स का रिव्यू साल में दो बार—जून और दिसंबर में—किया जाता है। जिन कंपनियों का प्रदर्शन कमजोर होता है, उन्हें सेंसेक्स से हटाया जाता है। इस प्रक्रिया का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सेंसेक्स में शामिल टॉप-30 कंपनियां देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत कर सकें और देश की प्रोडक्शन क्षमता और रोजगार बढ़ाने में योगदान दें।

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