Sweating Benefits: जानें कितना पसीना शरीर के लिए जरूरी है और किन बीमारियों से मिलता है फायदा

Sweating Benefits: जानें कितना पसीना शरीर के लिए जरूरी है और किन बीमारियों से मिलता है फायदा

Sweating Benefits: पसीना आना स्वास्थ्य के लिए जरूरी है। जानें दिनभर कितना पसीना सामान्य है, इसके फायदे और कब पसीना कम या ज्यादा होना खतरे की निशानी है।

Sweating Benefits: गर्म मौसम या शारीरिक मेहनत के दौरान अक्सर पसीना आता है। यह सिर्फ असुविधा नहीं, बल्कि शरीर की सेहत के लिए बेहद जरूरी प्रक्रिया है। पसीना शरीर के तापमान को नियंत्रित करने, हाइड्रेशन संतुलित रखने और कई बीमारियों से राहत दिलाने में मदद करता है।

पसीना क्यों आता है?

पसीना आना, जिसे परसीपरेशन कहा जाता है, शरीर का प्राकृतिक तापमान संतुलन बनाने का तरीका है। जब शरीर का तापमान बढ़ता है, तो ऑटोनॉमिक नर्वस सिस्टम पसीना बनाने वाली ग्रंथियों को सक्रिय करता है। ये ग्रंथियां त्वचा के जरिए पानी और नमकयुक्त तरल छोड़ती हैं, जो वाष्पित होकर शरीर को ठंडा करती हैं।

नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन की रिसर्च के अनुसार, पसीने की मात्रा व्यक्ति और समय के अनुसार बदलती रहती है। खासकर एथलीट्स या एंड्योरेंस ट्रेनिंग करने वालों में एक्सरसाइज, मौसम और शारीरिक स्थितियों के कारण पसीना अलग मात्रा में आता है। इसलिए हाइड्रेशन और तरल पदार्थों की पूर्ति बेहद जरूरी है।

पसीना शरीर में किस हिस्से से निकलता है और उसका घटक

पसीना मुख्य रूप से पानी होता है, जबकि लगभग 1% हिस्सा नमक और फैट से बना होता है। यह प्रक्रिया शरीर को ठंडा रखने और ओवरहीटिंग से बचाने के लिए जरूरी है। इसके अलावा तनाव, चिंता, घबराहट, मसालेदार खाना, कैफीन और हार्मोनल बदलाव जैसे मेनोपॉज भी पसीना बढ़ा सकते हैं।

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कितना पसीना सामान्य माना जाता है?

एक सामान्य स्वस्थ वयस्क व्यक्ति दिनभर में 0.5 से 2 लीटर पसीना निकाल सकता है। यह मात्रा कई बातों पर निर्भर करती है:

  • गर्मी या नमी

  • शारीरिक मेहनत या एक्सरसाइज

  • मानसिक तनाव या घबराहट

  • मसालेदार भोजन, कैफीन, शराब

  • हार्मोनल बदलाव

  • मेटाबॉलिज्म, फिटनेस और जेनेटिक फैक्टर्स

जरूरत से ज्यादा पसीना आना (Hyperhidrosis)

अत्यधिक पसीना आना हाइपरहाइड्रोसिस कहलाता है। इसके लक्षण हैं:

  • बिना मेहनत या गर्मी के पसीना आना

  • हथेलियों, पैरों या बगल में ज्यादा पसीना

  • रोजमर्रा के काम में परेशानी

  • बार-बार स्किन इंफेक्शन

प्राइमरी हाइपरहाइड्रोसिस में ग्रंथियां ज्यादा सक्रिय होती हैं। सेकेंडरी हाइपरहाइड्रोसिस डायबिटीज, थायरॉइड, मेनोपॉज या कुछ दवाओं के कारण हो सकता है।

पसीना कम आना (Hypohidrosis) भी खतरनाक

अगर पसीना कम आए या बिल्कुल न आए, तो इसे हाइपोहाइड्रोसिस कहते हैं। यह स्थिति हीट स्ट्रोक, डिहाइड्रेशन, चक्कर और बेहोशी जैसी समस्याओं को बढ़ा सकती है। अगर गर्मी या एक्सरसाइज के बावजूद पसीना न आए, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।

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