शिव पूजा नियम: सावन में शिव मंदिर जाकर पूजा के बाद भूलकर भी न करें ये गलतियाँ। जानिए पूजा के बाद के नियम, जिससे मिलेगा पूर्ण पुण्यफल।
शिव पूजा नियम: सावन माह को भगवान शिव का महीना माना जाता है। इस दौरान शिव मंदिर जाकर पूजा-अर्चना करने का अभूतपूर्व महत्व होता है। लेकिन पूजा के बाद कुछ ऐसे सामान्य नियम भी हैं, जिनका पालन न करने पर पूजा का पूरा फल/grant भी नहीं प्राप्त होता।
शिव मंदिर से वापस लौटने पर क्या काम न करें
-
खाली लोटा या जल नहीं लाएँ: पूजा के बाद मंदिर से खाली लोटा न लाएं। लोटे में थोड़ा पानी, अक्षत, फूल या चावल रखना चाहिए। इससे पूजा का शुद्ध फल बना रहता है।
-
पैर तुरंत न धोएं: मंदिर के पवित्र स्थान से निकलकर तुरंत पैर न धोएं। वहां की सकारात्मक ऊर्जा को शरीर में कुछ देर रहने दें।
-
पूजा सामग्री का सम्मानपूर्वक रखरखाव करें: घर पहुँचते ही पूजा की वस्तुएं इधर-उधर न रखें। लोटे की पानी, अक्षत, फूल इत्यादि को पौधे या दरवाजे पर डालें। आचार्य मंत्र की बात पूरी होने तक वस्तुओं का श्रद्धापूर्वक रखरखाव करें।
-
मंदिर की घंटी वापस बजाना निषिद्ध है: मंदिर में पूजा शुरू में घंटी बजाना शुभ माना जाता है, लेकिन वापस लौटते वक्त घंटी बजाने से पूजा का महत्व कम होता है।
इन नियमों का धार्मिक महत्व
-
शास्त्रों और पुराणों के अनुसार, शिवजी की पूजा करने वाले को सावधानी रखनी चाहिए, खासकर पूजा के पश्चात।
-
पूजा सामग्री को सम्मानपूर्वक रखना और मंदिर की पवित्र ऊर्जा को घर तक लाना पुण्यफल बढ़ाता है।
-
पूजा समाप्ति के बाद भी श्रद्धा बनाए रखने से अशुभ प्रभाव से बचने में मदद मिलती है।