Sawan 2025 में शिवलिंग की पूजा के दौरान दिशा का पालन करना जरूरी है। जानिए किस दिशा में होना चाहिए मुख और क्यों उत्तर दिशा मानी जाती है सर्वश्रेष्ठ।
सावन का पावन महीना (Sawan 2025) शिवभक्तों के लिए बेहद खास होता है। इस शुभ काल में भगवान शिव की पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है। पर क्या आप जानते हैं कि शिवलिंग की पूजा करते समय दिशा (Shivling Puja Direction) का भी बहुत महत्व होता है? धार्मिक ग्रंथों के अनुसार यदि पूजा के दौरान दिशा संबंधी नियमों का पालन न किया जाए, तो पूजा का संपूर्ण फल नहीं मिलता।
इस लेख में हम जानेंगे कि शिवलिंग की पूजा करते समय भक्त को किस दिशा की ओर मुख करना चाहिए, और क्यों यह नियम बेहद महत्वपूर्ण माना गया है।
शिवलिंग की पूजा के नियम: कौन सी दिशा है सर्वश्रेष्ठ?
धार्मिक ग्रंथों जैसे शिवपुराण और स्कंद पुराण में स्पष्ट रूप से बताया गया है कि शिवलिंग की पूजा करते समय उत्तर दिशा की ओर मुख करना सबसे उत्तम होता है।
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उत्तर दिशा की ओर मुख करके पूजा करना: इस स्थिति में भक्त शिवलिंग के ठीक सामने बैठता है, जिससे पूजा दोष रहित मानी जाती है। यह दिशा देवताओं और ऋषि-मुनियों की मानी जाती है, और इसे आध्यात्मिक उन्नति से भी जोड़ा गया है।
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पूर्व दिशा की ओर मुख करना क्यों नहीं है उचित?: यदि कोई भक्त पूर्व दिशा की ओर मुख करता है, तो वह शिवलिंग के मुख्य भाग को बाधित करता है, जिससे पूजा का प्रभाव कम हो सकता है।
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शिव-शक्ति के संतुलन का महत्व: जब भक्त उत्तर दिशा की ओर मुख करता है, तो वह शिवलिंग के बाईं ओर बैठता है, जिसे माता पार्वती का स्थान माना गया है। शास्त्रों के अनुसार, शिव और शक्ति का संयुक्त रूप में पूजन करना ही सर्वोत्तम होता है।
किस दिशा में बैठें और किस ओर हो मुख? जानिए सही स्थिति
भक्त को दक्षिण दिशा की ओर बैठना चाहिए और मुख उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए। इस अवस्था में भक्त भगवान शिव के सामने होता है और पूजा पूर्ण और दोषमुक्त मानी जाती है।
सावन में शिवलिंग की पूजा कैसे करें?
सावन के महीने में यदि भक्त उत्तर दिशा की ओर मुख करके शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र, शहद या गंगाजल अर्पित करते हैं, तो उन्हें भगवान शिव और माता पार्वती दोनों का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
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बेलपत्र पर “ॐ नमः शिवाय” लिखकर अर्पण करें
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शिवलिंग पर चढ़ाएं गंगाजल, दूध और शुद्ध जल
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उत्तर दिशा की ओर मुख रखते हुए शिव मंत्रों का जाप करें
उत्तर दिशा का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व
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उत्तर दिशा को धन, समृद्धि और आध्यात्मिक ज्ञान का प्रतीक माना गया है।
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स्कंद पुराण और वास्तु शास्त्र में उत्तर दिशा को देव दिशा कहा गया है।
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इसी दिशा से सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है, जिससे पूजा का प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है।
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