भारतीय रुपये ने अमेरिकी डॉलर के मुकाबले फिर से गिरावट दर्ज की है और इंटरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में 88.77 रुपये प्रति डॉलर के स्तर तक लुढ़क गया। यह पिछले बंद भाव 88.72 से 5 पैसे की गिरावट है, जो रुपये के लिए एक नया रिकॉर्ड निम्न स्तर साबित हो सकता है।
फिनरेक्स ट्रेजरी एडवाइजर्स एलएलपी के हेड ऑफ ड्रेजर अनिल कुमार भंसाली के अनुसार, डॉलर की मजबूती के साथ-साथ वैश्विक स्तर पर जोखिम-परहेज़ का माहौल और घरेलू कारक जैसे आरबीआई की स्थिर नीतियां तथा नियंत्रित मुद्रास्फीति रुपये की कमजोरी के मुख्य कारण हैं।
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डॉलर इंडेक्स में अमेरिकी-चीन व्यापार तनाव में नरमी के चलते थोड़ी गिरावट आई है, लेकिन वैश्विक आर्थिक अस्थिरता और भू-राजनीतिक घटनाक्रम अभी भी रुपये की दिशा तय करेंगे।
घरेलू शेयर बाजार में भी कमजोरी देखी गई, बीएसई सेंसेक्स 451 अंकों से अधिक गिर गया और निफ्टी 50 भी 109 अंकों की गिरावट के साथ बंद हुआ।
कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव भी रुपये पर दबाव बना रहा है, जहां ब्रेंट क्रूड 63.67 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है। हालांकि, विदेशी संस्थागत निवेशकों ने हाल ही में बाजार में खरीदारी की है, लेकिन डॉलर की मजबूती और वैश्विक अनिश्चितता के कारण रुपया कमजोर बना हुआ है।