Table of Contents
राजस्थान कैबिनेट की बैठक में कई अहम फैसले लिए गए, जिनमें प्रवासी राजस्थानियों के लिए विशेष विभाग का गठन, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर पॉलिसी 2025 की मंजूरी और ऊर्जा क्षेत्र में 15,600 करोड़ रुपये की परियोजनाओं की स्वीकृति शामिल है। इन निर्णयों से रोजगार, निवेश और अक्षय ऊर्जा विकास को नई दिशा मिलेगी।
प्रवासी राजस्थानियों के लिए नया विभाग
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की अध्यक्षता में हुई बैठक में राज्य सरकार ने ‘राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय प्रवासी राजस्थानी मामले विभाग’ बनाने का निर्णय लिया। यह विभाग प्रवासियों और सरकार के बीच संवाद स्थापित करेगा, उनके मुद्दों का समाधान करेगा और नीति निर्माण में सहयोग करेगा। इसके तहत प्रवासी राजस्थानियों के सम्मान समारोह, दिवस और एक्सचेंज प्रोग्राम आयोजित किए जाएंगे। प्रवासी एसोसिएशनों का पंजीकरण भी इसी विभाग द्वारा संचालित होगा।
राजस्थान बनेगा ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर हब
कैबिनेट ने राजस्थान ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर पॉलिसी-2025 को मंजूरी दी। नीति के तहत 2030 तक 200 से अधिक जीसीसी स्थापित किए जाएंगे, जिससे लगभग 1.5 लाख रोजगार सृजित होंगे। परियोजना लागत का 30% (अधिकतम 10 करोड़), भूमि लागत की प्रतिपूर्ति, तीन वर्षों तक पेरोल सब्सिडी और रेंटल असिस्टेंस जैसी सुविधाएँ जीसीसी को उपलब्ध होंगी। ग्रीन इनोवेशन और रिसर्च गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा।
also read: राजस्थान की विकास यात्रा की झलक, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा…
ऊर्जा क्षेत्र में बड़ा निवेश
आरवीयूएनएल और सिंगरेनी कोलियरीज कंपनी लिमिटेड (एससीसीएल) के बीच संयुक्त उपक्रम को मंजूरी मिली। इस जेवी में 9600 करोड़ की 800 मेगावाट कोयला आधारित विद्युत परियोजना और 6000 करोड़ की 1500 मेगावाट सौर परियोजनाएं शामिल हैं। कुल 15,600 करोड़ की इन परियोजनाओं से राजस्थान की बिजली क्षमता बढ़ेगी।
महाविद्यालयों के नामकरण और भूमि आवंटन
सिरोही के राजकीय महाविद्यालय कालन्द्री का नाम संघवी हीराचंदजी फूलचंदजी राजकीय महाविद्यालय और कैलाश नगर का महाविद्यालय मातुश्री पुरीबाई पुनमाजी माली टोरसो राजकीय महाविद्यालय रखा जाएगा। साथ ही, बीकानेर, चित्तौड़गढ़ और बाड़मेर में सौर और ट्रांसमिशन परियोजनाओं के लिए 588 हेक्टेयर से अधिक भूमि आवंटित की गई।
इन फैसलों से राजस्थान में निवेश, रोजगार, अक्षय ऊर्जा और राज्य की आर्थिक विकास दर को बढ़ावा मिलेगा।