मारुति सुजुकी अपनी पहली इलेक्ट्रिक कार ई-विटारा को जनवरी 2026 में भारतीय बाजार में लॉन्च करने जा रही है। इसके साथ ही कंपनी ने भारत में 1 लाख EV चार्जिंग स्टेशन खोलने का बड़ा ऐलान किया है। इस पहल से देश में इलेक्ट्रिक वाहन (EV) चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत किया जाएगा, जिससे संभावित EV मालिकों को चार्जिंग स्टेशन की उपलब्धता को लेकर कोई चिंता नहीं होगी।
EV चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार
2 दिसंबर 2025 को मारुति ने ई-विटारा को रिवील करते हुए यह घोषणा की कि वे 2030 तक 1 लाख EV चार्जिंग स्टेशन भारत में खोलने की योजना बना रहे हैं। इन चार्जिंग स्टेशनों से देशभर में इलेक्ट्रिक वाहनों के इस्तेमाल को बढ़ावा मिलेगा और लोग पेट्रोल-डीजल गाड़ियों की बजाय इलेक्ट्रिक वाहनों को ज्यादा अपनाएंगे। इससे लंबी दूरी की यात्रा करने वाले ग्राहकों को भी अब चार्जिंग की चिंता नहीं रहेगी।
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‘e for me’ चार्जिंग प्लेटफॉर्म
मारुति ने इस पहल के तहत ‘e for me’ डिजिटल चार्जिंग प्लेटफॉर्म की शुरुआत की है। यह प्लेटफॉर्म 13 प्रमुख चार्ज पॉइंट ऑपरेटरों (COPs) के साथ मिलकर काम करेगा, जो पूरे देश में पब्लिक EV चार्जिंग स्टेशन स्थापित करेंगे। इस प्लेटफॉर्म को मोबाइल ऐप और ई-विटारा के इंफोटेनमेंट सिस्टम के माध्यम से एक्सेस किया जा सकता है, जिससे ग्राहकों को चार्जिंग स्टेशन ढूंढने में आसानी होगी।
भारत में बढ़ता EV चार्जिंग नेटवर्क
मारुति सुजुकी ने अब तक 2,000 से ज्यादा EV चार्जिंग स्टेशन खोले हैं, जो 1,100 से अधिक शहरों में स्थित हैं। 2030 तक 1 लाख चार्जिंग पॉइंट्स का लक्ष्य रखने से यह नेटवर्क और भी मजबूत होगा। इससे ना केवल ग्राहकों को सुविधा होगी, बल्कि देशभर में इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग को बढ़ावा मिलेगा।
Made-in-India E-Vitara: एक नया बदलाव
मारुति की ई-विटारा पूरी तरह से मेड-इन-इंडिया है और इसे 1 लाख किलोमीटर से अधिक चलाकर टेस्ट किया गया है। इसे बर्फीले और रेतीले इलाकों में भी चलाया गया, जिससे इसकी ताकत और विश्वसनीयता साबित हुई है। ई-विटारा की ARAI-सर्टिफाइड सिंगल चार्ज रेंज 543 किलोमीटर है, जो इसे भारत में उपलब्ध सबसे बेहतर इलेक्ट्रिक वाहनों में से एक बनाता है।
भारत की ग्रीन फ्यूचर की ओर एक कदम
मारुति सुजुकी का यह कदम इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की दिशा में बड़ा बदलाव ला सकता है। 1 लाख चार्जिंग स्टेशन खोले जाने से भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत होगा, जिससे लोग आसानी से इलेक्ट्रिक वाहनों का उपयोग कर सकेंगे और पेट्रोल-डीजल वाहनों की तुलना में अधिक पर्यावरण मित्र बन सकेंगे।