लद्दाख में चुनावी देरी के चलते लेह हिल काउंसिल का पांच साल का कार्यकाल पूरा होने के बाद समाप्त हो गया, जबकि कारगिल हिल काउंसिल का कार्यकाल जारी है। केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए लद्दाख के लेफ्टिनेंट गवर्नर से कुछ महत्वपूर्ण वित्तीय शक्तियाँ छीन ली हैं, जिनका उपयोग अब गृह मंत्रालय द्वारा किया जाएगा।
गृह मंत्रालय को अब उन योजनाओं और परियोजनाओं को मंजूरी देने की शक्ति प्राप्त होगी जिनकी लागत 100 करोड़ रुपये तक है। इससे पहले यह पावर लद्दाख के लेफ्टिनेंट गवर्नर के पास थी। इसके अलावा, MHA को अब 20 करोड़ रुपये तक के प्रशासनिक अनुमोदन देने की भी शक्ति मिल गई है, जो पहले प्रशासनिक सचिव के पास थी।
इसके साथ ही, चीफ इंजीनियर, डिप्टी कमिश्नर, और अन्य विभाग प्रमुखों को 3 से 10 करोड़ रुपये तक के कामों को मंजूरी देने की शक्ति का इस्तेमाल करने से रोक दिया गया है। इन बदलावों के बाद, अब इन सभी शक्तियों का नियंत्रण केंद्रीय गृह मंत्रालय के पास होगा।
केंद्रीय गृह मंत्रालय से प्राप्त निर्देशों के आधार पर, लद्दाख के लेफ्टिनेंट गवर्नर कविंदर गुप्ता ने एक आदेश जारी किया है, जिसमें साफ किया गया है कि सभी नई योजनाओं और परियोजनाओं को गृह मंत्रालय द्वारा मंजूरी प्राप्त करने के बाद ही शुरू किया जाएगा। इसके लिए, प्रपोजल को लद्दाख के प्लानिंग, डेवलपमेंट एंड मॉनिटरिंग डिपार्टमेंट के जरिए MHA को भेजा जाएगा।
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क्या होगा पहले से चल रही परियोजनाओं का?
हालांकि, यह स्पष्ट किया गया है कि जो परियोजनाएँ पहले से चल रही हैं, उनके लिए पहले से दी गई अनुमतियाँ और आदेश मान्य रहेंगे। यानी, यदि कोई परियोजना पहले ही स्वीकृत हो चुकी है, या टेंडर जारी हो चुका है, तो उसे पहले दी गई शक्तियों के तहत ही चलाया जाएगा।
इसके अलावा, लद्दाख के लेफ्टिनेंट गवर्नर को अब अपने बजटीय सीमा के भीतर आकस्मिक और अन्य खर्चों के लिए अनुमोदन देने की शक्ति होगी, बशर्ते वह जनरल फाइनेंशियल रूल्स के तहत हो।
बजटीय सीमा में कौन-कौन से बदलाव?
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने यह भी तय किया है कि:
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चीफ सेक्रेटरी को 1 करोड़ रुपये तक की अनुमोदन की शक्ति प्राप्त होगी।
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फाइनेंस सेक्रेटरी को 75 लाख रुपये तक की अनुमोदन की शक्ति प्राप्त होगी।
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प्रशासनिक सचिव को 50 लाख रुपये तक की अनुमोदन की शक्ति प्राप्त होगी।
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विभाग प्रमुखों (HoD) को 30 लाख रुपये तक की अनुमोदन की शक्ति प्राप्त होगी।
PPP मोड में 100 करोड़ रुपये तक की मंजूरी
PPP (पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप) मोड के तहत 100 करोड़ रुपये तक की परियोजनाओं की मंजूरी, जो पहले लेफ्टिनेंट गवर्नर के पास थी, अब गृह मंत्रालय के हाथों में होगी। यह फैसला लद्दाख के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है, क्योंकि यह निर्णय गृह मंत्रालय के नियंत्रण को मजबूत करेगा।
इस बदलाव से यह उम्मीद जताई जा रही है कि लद्दाख में चल रही परियोजनाओं की पारदर्शिता और गति में सुधार होगा, और केंद्रीय सरकार के निगरानी में कार्यों में बेहतर समन्वय होगा।