काली पूजा 2025: काली पूजा कब है? शुभ मुहूर्त, आरती, मंत्र, महत्व और पूजा विधि

काली पूजा 2025: काली पूजा कब है? शुभ मुहूर्त, आरती, मंत्र, महत्व और पूजा विधि

काली पूजा 2025: जानिए काली पूजा कब है, शुभ मुहूर्त, आरती, मंत्र, महत्व, पूजा विधि और भोग की पूरी जानकारी। इस कार्तिक मास में मां काली की पूजा सही समय और विधि से करें।

काली पूजा 2025 का त्योहार इस साल 20 अक्टूबर 2025, सोमवार को मनाया जाएगा। कार्तिक मास में मनाया जाने वाला यह पावन पर्व मां काली को समर्पित है और उत्तर भारत, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, असम समेत कई राज्यों में बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। आइए जानते हैं काली पूजा का महत्व, शुभ मुहूर्त, पूजा सामग्री, मंत्र और पूजा विधि के बारे में पूरी जानकारी।

काली पूजा का महत्व

काली पूजा, जिसे श्याम पूजा भी कहा जाता है, मां काली के शक्तिशाली रूप की उपासना का त्योहार है। मां काली शक्ति, सुरक्षा और बुराई के नाश की देवी मानी जाती हैं। इस दिन उनकी पूजा-अर्चना से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है। यह त्योहार खासकर दीवाली की रात को मनाया जाता है।

काली पूजा 2025 शुभ मुहूर्त और समय

  • निशिता काल: रात 11:55 बजे से लेकर रात 12:44 बजे तक (21 अक्टूबर से 22 अक्टूबर 2025)

  • अमावस्या तिथि प्रारंभ: 21 अक्टूबर 2025 सुबह 6:29 बजे

  • अमावस्या तिथि समाप्त: 22 अक्टूबर 2025 सुबह 4:55 बजे

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काली पूजा की पूजा सामग्री

  • मां काली, भगवान गणेश और भगवान विष्णु की प्रतिमाएं

  • धूप-दीप

  • चावल और दरबा घास

  • चंदन पाउडर

  • तांत्रिक प्रतीक

  • फल, मिठाई, मांस, मछली और दाल (भोग में लगाने के लिए)

काली पूजा कैसे करें?

काली पूजा तंत्र-मंत्र से जुड़ी होती है, लेकिन इसे हर कोई अपने घर पर श्रद्धा और भक्ति के साथ कर सकता है। पूजा में मां काली की प्रतिमा के सामने धूप-दीप जलाएं, मंत्रों का जाप करें और भोग लगाएं। भक्त विशेष रूप से फल, मिठाई, और यदि परंपरा अनुसार हो तो मांस-मछली का भोग भी लगाते हैं। पूजा के दौरान मां काली के आराधना मंत्र और श्लोक का उच्चारण करें।

काली पूजा 2025 के प्रमुख स्थान

यह त्योहार मुख्य रूप से पश्चिम बंगाल, कोलकाता, असम, ओडिशा और उत्तर भारत के कई राज्यों में बड़े उत्साह से मनाया जाता है। खासतौर पर कोलकाता और गुवाहाटी में काली पूजा की रात बहुत भव्य होती है।

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