भारत की अर्थव्यवस्था ‘गोल्डीलॉक्स’ ज़ोन में प्रवेश कर रही है, क्योंकि महँगाई नियंत्रण में और विकास स्थिर बना हुआ है। RBI संभावित रूप से अगस्त में रेपो रेट में कटौती कर सकता है।
गोल्डीलॉक्स शब्द बचपन की उस कहानी से लिया गया है, जिसमें गोल्डीलॉक्स न बहुत गर्म और न बहुत ठंडा, बल्कि एक “सही संतुलन” वाली चीज को ही पसंद कर लेती है। अर्थशास्त्र में भी इसे बैलेंस्ड ग्रोथ के लिए प्रयोग किया जाता है—ना ज़्यादा महँगाई, ना मंदी—सही मात्रा में वृद्धि।
भारत की अर्थव्यवस्था परिघटना में ठीक-ठाक रहे रही
वर्तमान में भारत की अर्थव्यवस्था बिल्कुल गोल्डीलॉक्स के समान है। ना तेज वृद्धि इतनी हुई कि महँगाई तेजी से बढ़ जाए और ना ही बढ़ोतरी इतनी धीमी कि मंदी आ जाए। इस स्थिरता का श्रेय मुख्य रूप से आरबीआई और सरकार द्वारा अपनाई गई मौद्रिक और राजकोषीय नीतियों को जाता है।
महँगाई के आंकड़े दे रहे सकारात्मक संकेत
-
जून 2025 में रिटेल महँगाई: 2.1% — आरबीआई के अनुमान (3.7%) से काफ़ी कम
-
Q1 (अप्रैल–जून) औसत महँगाई: 2.7% — अनुमानित 2.9% से नीचे
यदि यह रुझान बना रहता है, तो जुलाई का आंकड़ा 2% से नीचे आ सकता है, और वर्षांत तक यह 3% के आसपास रह सकता है।
कीमतों में स्थिरता और सप्लाई चेन सुधार
खाद्य और ईंधन की कीमतों में नियंत्रण तथा सप्लाई चेन में सुधार से महँगाई को नियंत्रित रखा जा सका है। इसके कारण मॉनिटरी पॉलिसी में भी कुछ ढील देने की गुंजाइश बनी हुई है।
रेपो रेट पर RBI का रुख
RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने संकेत दिया है कि अगर महँगाई और विकास दोनों नियंत्रित बने रहे, तो रेपो रेट में कटौती की जा सकती है।
फिलहाल फरवरी, अप्रैल और जून में पहले ही रेपो रेट में कटौती हो चुकी है। अगस्त की MPC बैठक में संभवत: एक और बदलाव आ सकता है, हालांकि नवीन डेटा समीक्षा के आधार पर निर्णय होगा।
For more news: Business