भारतीय मुद्रा ने हाल ही में रिकॉर्ड निचले स्तर को पार करने के बाद तेजी से वापसी का संकेत दिया है। अंतरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया शुक्रवार को 90.19 के स्तर पर खुला और धीरे-धीरे मजबूती के साथ 89.96 प्रति डॉलर तक पहुंच गया। यह पिछले बंद भाव से 24 पैसे की बढ़त को दर्शाता है, जिससे विदेशी मुद्रा बाजार में राहत का माहौल बना।
विशेषज्ञों के अनुसार, डॉलर के मुकाबले रुपये में आई यह मजबूती भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की संभावित सक्रिय भूमिका और हस्तक्षेप का नतीजा है। आरबीआई का उद्देश्य रुपये में अत्यधिक उतार-चढ़ाव को रोकना और बाजार में स्थिरता बनाए रखना है। इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें करीब 59 डॉलर प्रति बैरल स्थिर रहने से भी रुपये को समर्थन मिला, क्योंकि भारत एक बड़ा तेल आयातक देश है और तेल की कीमतों में स्थिरता से चालू खाता घाटे पर दबाव कम होता है।
गौरतलब है कि गुरुवार को भी रुपया 18 पैसे मजबूत होकर 90.20 पर बंद हुआ था, जिससे संकेत मिलता है कि लगातार गिरावट के बाद अब मुद्रा में सुधार की संभावना बढ़ रही है। डॉलर इंडेक्स, जो छह प्रमुख वैश्विक मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की स्थिति बताता है, मामूली बढ़त के साथ 98.46 पर रहा।
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शेयर बाजार में भी दिखी तेजी
भारतीय शेयर बाजार में भी सकारात्मक रुख देखने को मिला। सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में 375.98 अंकों की तेजी के साथ 84,857.79 अंक पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी 110.60 अंकों की बढ़त के साथ 25,934.15 पर कारोबार करता दिखा। इस तेजी को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की खरीदारी का भी समर्थन मिला, जिन्होंने गुरुवार को शुद्ध रूप से 595.78 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे।
कुल मिलाकर, आरबीआई की सक्रिय भूमिका, कच्चे तेल की स्थिर कीमतें और शेयर बाजार में सकारात्मक माहौल के चलते रुपया फिलहाल दबाव से बाहर निकलता दिख रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में डॉलर–रुपया की जोड़ी में और स्थिरता देखने को मिल सकती है।