भारतीय रुपये (INR) में लगातार गिरावट देखने को मिल रही है। मंगलवार को डॉलर के मुकाबले रुपया 89.85 प्रति डॉलर के अपने ऑल टाइम लो स्तर पर पहुंच गया। पिछले कारोबारी दिन ही रुपया अपने ऐतिहासिक निचले स्तर को छू चुका था, लेकिन अगले ही दिन यह रिकॉर्ड तोड़ते हुए और गिर गया।
विशेषज्ञों का कहना है कि रुपये में यह गिरावट ऐसे समय में हो रही है जब भारत की GDP ग्रोथ दर 2025-26 की दूसरी तिमाही में 8.2 प्रतिशत दर्ज की गई है, जो अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत है। लेकिन डॉलर के मुकाबले लगातार कमजोरी के चलते रुपये पर दबाव बना हुआ है।
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रुपया क्यों गिर रहा है?
पिछले महीने में रुपया लगभग 90 पैसे कमजोर हुआ है। विदेशी मुद्रा बाजार में मंगलवार को रुपया 89.70 पर खुला, लेकिन कुछ ही समय में यह 89.85 के ऐतिहासिक निचले स्तर तक गिर गया। पिछले छह महीनों में रुपये में कुल गिरावट लगभग 4.4 प्रतिशत रही है।
विशेष रूप से अमेरिकी टैरिफ और द्विपक्षीय व्यापार वार्ता में कोई स्पष्ट समझौता न होने के कारण रुपये को समर्थन नहीं मिल रहा है।
प्रभाव और संभावित परिणाम
रुपये में लगातार गिरावट से कच्चा तेल, सोना, मशीनरी और फर्टिलाइजर्स जैसी डॉलर्ड-डिनॉमिनेटेड वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि मुद्रा बाजार में यह स्थिति यदि लंबी अवधि तक बनी रहती है, तो आम उपभोक्ताओं पर इसका असर महंगाई के रूप में देखने को मिलेगा।
वित्त और निवेश विशेषज्ञों की सलाह है कि निवेशक इस समय रुपये की कमजोरी और वैश्विक आर्थिक कारकों पर ध्यान दें और निवेश योजनाओं में सतर्क रहें।