भारत 2025 में बना दुनिया का सबसे बड़ा चांदी आयातक, चांदी की कीमत तीन गुना बढ़ी, औद्योगिक मांग में उछाल और चीन के निर्यात नियम से बढ़ी वैश्विक चिंता।
2025 में चांदी की कीमतों में अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की गई, लेकिन इसके बावजूद भारत दुनिया का सबसे बड़ा चांदी आयातक बना रहा। ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) की रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी 2025 में चांदी का दाम लगभग 80,000–85,000 रुपये प्रति किलोग्राम था, जो जनवरी 2026 में बढ़कर 2.43 लाख रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गया।
भारत का चांदी आयात रिकॉर्ड
भारत ने साल 2025 में लगभग 9.2 अरब डॉलर मूल्य की रिफाइंड सिल्वर का आयात किया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 44% अधिक था। रिपोर्ट के अनुसार, औद्योगिक मांग, वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और आपूर्ति की अनिश्चितताओं ने चांदी को रणनीतिक धातु के रूप में और महत्वपूर्ण बना दिया है।
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औद्योगिक मांग का बड़ा योगदान
आज विश्व की 50% से अधिक चांदी का उपयोग औद्योगिक क्षेत्रों में होता है। इसमें प्रमुख रूप से इलेक्ट्रॉनिक्स, सौर ऊर्जा, इलेक्ट्रिक वाहन (EV), रक्षा उपकरण और मेडिकल टेक्नोलॉजी शामिल हैं। केवल सौर ऊर्जा क्षेत्र में ही वैश्विक चांदी की करीब 15% खपत हो रही है।
मांग बनाम आपूर्ति का अंतर
2000 के बाद से रिफाइंड सिल्वर की वैश्विक मांग लगभग आठ गुना बढ़ चुकी है, जबकि आपूर्ति अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच सकी। चीन, जो दुनिया का सबसे बड़ा चांदी निर्यातक है, ने हाल ही में चांदी के निर्यात के लिए लाइसेंस अनिवार्य कर दिया है। इस नियम के तहत अब हर शिपमेंट के लिए चीनी सरकार की मंजूरी आवश्यक होगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि चीन का यह कदम वैश्विक चांदी आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव बढ़ा सकता है और भविष्य में कीमतों में उतार-चढ़ाव की संभावना बढ़ा सकता है।