प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर के बीच मुंबई में हुई बैठक ने भारत और ब्रिटेन के ऐतिहासिक और रणनीतिक संबंधों को और मजबूती प्रदान की है। दोनों नेताओं ने व्यापार, रक्षा सहयोग, तकनीकी साझेदारी और वैश्विक स्थिरता के मुद्दों पर विस्तार से बातचीत की। इस बैठक के दौरान भारत-यूके साझेदारी को वैश्विक आर्थिक प्रगति और सुरक्षा का मजबूत स्तंभ बताया गया।
भारत-यूके रणनीतिक साझेदारी को मिली नई ऊर्जा
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और ब्रिटेन प्राकृतिक साझेदार हैं, जिनके संबंध लोकतंत्र, स्वतंत्रता और कानून के शासन जैसे साझा मूल्यों पर आधारित हैं। उन्होंने यह भी बताया कि वैश्विक अनिश्चितता के बीच यह साझेदारी विश्व स्तर पर स्थिरता और आर्थिक विकास को बढ़ावा दे रही है। ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने भारत के साथ हुए व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौते (CETA) को दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को बढ़ाने वाला एक महत्वपूर्ण कदम बताया।
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व्यापार और रक्षा सहयोग पर हुई चर्चा
दोनों नेताओं ने जॉइंट इकॉनमिक एंड ट्रेड कमेटी को फिर से स्थापित करने का स्वागत किया, जो व्यापार समझौते के क्रियान्वयन और निवेश को बढ़ावा देगा। रक्षा के क्षेत्र में भी दोनों देशों ने सहयोग को बढ़ाने पर सहमति जताई। इसमें इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा केंद्र की स्थापना और भारतीय वायु सेना के उड़ान प्रशिक्षकों के ब्रिटिश रॉयल एयर फोर्स प्रशिक्षण में शामिल होने जैसे कदम शामिल हैं। इसके अलावा हल्के मल्टीरोल मिसाइल सिस्टम की आपूर्ति और समुद्री इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन सिस्टम्स के विकास के लिए भी समझौते पर चर्चा हुई।
क्लाइमेट टेक्नोलॉजी और नवप्रवर्तन में साझेदारी
प्रधानमंत्री मोदी ने जलवायु, प्रौद्योगिकी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में नवप्रवर्तकों और स्टार्टअप्स को समर्थन देने के लिए क्लाइमेट टेक्नोलॉजी स्टार्टअप फंड की स्थापना का स्वागत किया। साथ ही, दोनों देशों ने क्रिटिकल मिनरल्स के सहयोग के लिए उद्योग गिल्ड और आपूर्ति श्रृंखला ऑब्जर्वेटरी स्थापित करने पर सहमति व्यक्त की, जिसका उप-केन्द्र भारतीय स्कूल ऑफ माइंस, धनबाद में होगा।
ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर का बयान
कीर स्टार्मर ने भारत की विकास कहानी की प्रशंसा करते हुए प्रधानमंत्री मोदी को 2028 तक भारत को दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि भारत-यूके समझौते से दोनों देशों के बाजारों तक पहुंच बढ़ेगी और रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।