हरियाणा के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी और एडीजीपी वाई. पूरन कुमार की 7 अक्टूबर 2025 को चंडीगढ़ स्थित उनके आधिकारिक आवास पर हुई आत्महत्या ने प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में हड़कंप मचा दिया है। उनकी पत्नी और वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अमनीत पी. कुमार ने इस घटना को हत्या करार देते हुए मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से मुलाकात कर डीजीपी शत्रुजीत सिंह कपूर और रोहतक के एसपी नरेंद्र बिजारणिया के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की मांग की है।
आत्महत्या या हत्या?
पूरन कुमार ने अपने 9 पेज के सुसाइड नोट में डीजीपी कपूर समेत कई वरिष्ठ अधिकारियों पर जातिगत भेदभाव, मानसिक उत्पीड़न, पदोन्नति में पक्षपात और फर्जी मुकदमों के गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने मई 2024 में मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर आईपीएस अधिकारियों की अवैध प्रोन्नति की शिकायत भी की थी। उनके मुताबिक, 29 सितंबर को उन्हें रोहतक के सुनरिया जेल में ट्रांसफर किया गया था, जो उनके मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर डाल रहा था।
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पत्नी की शिकायत और मांगें
जू Japan दौरे से लौटकर अमनीत पी. कुमार ने मुख्यमंत्री से मुलाकात कर दो पन्नों की लिखित शिकायत सौंपा, जिसमें आरोपित अधिकारियों को निलंबित और गिरफ्तार करने, तथा परिवार को सुरक्षा प्रदान करने की मांग की गई है। उन्होंने कहा कि यह आत्महत्या नहीं बल्कि सुनियोजित हत्या है, जिसमें उच्च अधिकारियों की भूमिका संदेह से परे नहीं है।
प्रशासन की प्रतिक्रिया और जांच
चंडीगढ़ पुलिस ने पूरन कुमार की मौत की जांच शुरू कर दी है और सुसाइड नोट को एक महत्वपूर्ण सबूत माना जा रहा है। साथ ही, हरियाणा सरकार में संभावित फेरबदल की खबरें भी सामने आ रही हैं। सूत्रों का कहना है कि जल्द ही ओपी सिंह को हरियाणा का नया डीजीपी नियुक्त किया जा सकता है, जबकि रोहतक के एसपी को हटाने की तैयारी है।
राजनीतिक बयानबाजी
कांग्रेस सहित अन्य राजनीतिक दलों ने इस मामले को प्रशासनिक विफलता और दलित उत्पीड़न करार दिया है। कांग्रेस के एसटी-एससी विभाग के अध्यक्ष मनोज बागड़ी ने इसे हत्या बताते हुए दोषियों को सख्त सजा देने की मांग की है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि ऐसे मामलों से साफ होता है कि कानून-व्यवस्था कमजोर हो चुकी है और दलित अधिकारियों को न्याय नहीं मिल पा रहा है।
आगे की कार्रवाई
पूरन कुमार के पोस्टमार्टम के बाद मामले की गहराई से जांच की जाएगी। राष्ट्रीय अनुसूचित जाति/जनजाति आयोग ने भी इस घटना पर स्वतः संज्ञान लेते हुए संबंधित अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी है। परिवार ने भी न्याय और सुरक्षा की उम्मीद जताई है।
यह मामला हरियाणा पुलिस विभाग के भीतर गंभीर सवाल खड़े करता है, जहां जातिगत भेदभाव और मानसिक उत्पीड़न के आरोप से प्रशासनिक व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवाल उठे हैं। पूरे देश की नजर अब इस मामले की निष्पक्ष और तेज जांच पर टिकी हुई है।