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हरियाणा के मंत्री अनिल विज ने बिहार चुनाव से पहले वोटर लिस्ट वेरिफिकेशन को लोकतांत्रिक प्रक्रिया बताते हुए विपक्ष पर निशाना साधा। जानिए उनके बयान की पूरी खबर।
हरियाणा के मंत्री अनिल विज ने बिहार विधानसभा चुनाव से पहले राज्य में हो रहे मतदाता सूची सत्यापन को लोकतंत्र की आवश्यक प्रक्रिया बताया है। उन्होंने इस प्रक्रिया का विरोध कर रहे विपक्षी दलों पर कड़ी प्रतिक्रिया दी और इसे फर्जी वोटों और फर्जी नेताओं की राजनीति करार दिया।
वोटर लिस्ट वेरिफिकेशन पर अनिल विज का विपक्ष को तगड़ा जवाब
मंत्री अनिल विज ने कहा कि मतदाता सूची में गड़बड़ी की शिकायतों को लेकर पहले विपक्ष चुप रहता था, लेकिन अब जब चुनाव से पहले सत्यापन हो रहा है, तब वही दल इसका विरोध कर रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि “जब मतदाता सूची में सुधार का काम हो रहा है, तो इसमें क्या गलत है? अगर दस्तावेज सही हैं तो सत्यापन कराएं।”
लोकतंत्र में चुनाव की पारदर्शिता जरूरी
विज ने जोर देकर कहा कि भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में चुनाव की पारदर्शिता अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा, “वोटर लिस्ट को दुरुस्त करना चुनाव प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने का एक अहम कदम है। अगर आपके पास सही दस्तावेज हैं, तो मतदाता सत्यापन कराएं और वोट बनवाएं।”
सुप्रीम कोर्ट ने भी वोटर लिस्ट सुधार को बताया जरूरी
हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने मतदाता सूची सत्यापन को लेकर टिप्पणी की थी कि इसे ‘कृत्रिम’ कहना उचित नहीं है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि मतदाता सूची का सत्यापन चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है, जबकि नागरिकता संबंधित मामले गृह मंत्रालय के अधिकार क्षेत्र में आते हैं।
बिहार चुनाव से पहले बढ़ा मतदाता सूची विवाद
बिहार विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही मतदाता सूची के सत्यापन को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। विपक्षी दल खासकर राष्ट्रीय जनता दल और कांग्रेस, चुनाव आयोग पर इस प्रक्रिया को लेकर सवाल उठा रहे हैं। ऐसे में अनिल विज के बयान ने इस बहस में नया मोड़ दिया है।
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