Table of Contents
GST 2.0: त्योहारी सीजन से पहले सरकार ने उपभोक्ताओं को बड़ी राहत दी है। अब टीवी, एसी, फ्रिज, और वॉशिंग मशीन जैसे इलेक्ट्रॉनिक सामानों पर GST को 28% से घटाकर 18% कर दिया गया है। इससे इन वस्तुओं की खरीदारी अब और भी आसान हो गई है। आइए जानते हैं कि कौन से सामान सस्ते हुए हैं और आपको कितनी बचत होगी।
नए GST स्लैब्स के तहत ये सामान हुए सस्ते
जीएसटी काउंसिल की बैठक के बाद सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों पर GST दरें घटाने का फैसला किया था, और अब यह नए रेट्स 22 सितंबर 2025 से लागू हो गए हैं। इसके तहत टीवी, एसी, वॉशिंग मशीन, डिशवॉशर, और प्रोजेक्टर जैसे सामानों पर पहले 28% के मुकाबले सिर्फ 18% GST लगेगा।
सस्ते हुए इलेक्ट्रॉनिक प्रोडक्ट्स:
-
एयर कंडीशनर (AC)
-
रेफ्रिजरेटर (Fridge)
-
वॉशिंग मशीन
-
डिशवॉशर
-
बड़े स्क्रीन वाले टीवी (32 इंच से ऊपर)
-
मॉनिटर और प्रोजेक्टर
GST में कमी से कितनी होगी बचत?
नए GST दरों के लागू होने से कीमतों में 8-9% तक की कमी आएगी। उदाहरण के लिए, अगर एक वॉशिंग मशीन पहले ₹30,000 की थी, तो अब वह आपको लगभग ₹27,500 में मिल सकती है। इसी तरह, एसी पर ₹3,500 से ₹4,500 तक की बचत हो सकती है, जिससे मिडिल क्लास परिवारों के लिए इन वस्तुओं की खरीदारी और भी किफायती हो जाएगी।
बड़े स्क्रीन वाले टीवी, जो त्योहारी सीजन में सबसे ज्यादा बिकते हैं, अब अधिक लोगों की पहुंच में होंगे। मिड-रेंज रेफ्रिजरेटर और वॉशिंग मशीन भी अब आम परिवारों के लिए किफायती हो जाएंगे।
also read: Mahindra Thar Facelift 2025: नए फीचर्स और डिजाइन के साथ…
मोबाइल और लैपटॉप पर GST क्यों नहीं घटा?
हालांकि बड़े इलेक्ट्रॉनिक सामानों पर GST में राहत मिली है, लेकिन स्मार्टफोन और लैपटॉप पर टैक्स में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इन पर पहले से ही 18% GST लागू है, जो “स्टैंडर्ड गुड्स” कैटेगरी में आता है। इसका कारण यह हो सकता है कि भारत में स्मार्टफोन और लैपटॉप का बाजार बहुत बड़ा है और इन पर GST घटाने से राजस्व में भारी हानि हो सकती थी। इसके अलावा, सरकार पहले ही मोबाइल उद्योग को PLI स्कीम और इंपोर्ट ड्यूटी छूट से फायदा दे चुकी है।
अगर आप GST में कमी की उम्मीद से स्मार्टफोन या लैपटॉप सस्ते होने का इंतजार कर रहे थे, तो यह खबर आपको निराश कर सकती है। इन उत्पादों पर छूट केवल सीजनल सेल और ऑफर्स में ही मिलेगी।
यह बदलाव क्यों है अहम?
कुल मिलाकर, सरकार ने 5% (आवश्यक सामान), 18% (सामान्य सामान) और 40% (लग्जरी/हानिकारक सामान) के तीन स्लैब तय करके एक बेहतरीन संतुलन स्थापित किया है। इससे आम लोगों को राहत मिली है और सरकार का राजस्व भी सुरक्षित रहेगा। यह बदलाव भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स बाजार के लिए एक मील का पत्थर साबित हो सकता है, जिससे उपभोक्ताओं को कई फायदे होंगे।