हरियाली अमावस्या 2025: नान्दीमुख श्राद्ध क्यों किया जाता है और इससे क्या लाभ होता है?

हरियाली अमावस्या 2025: नान्दीमुख श्राद्ध क्यों किया जाता है और इससे क्या लाभ होता है?

हरियाली अमावस्या 2025 पर नान्दीमुख श्राद्ध क्यों किया जाता है? जानें पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और इस श्राद्ध के करने से मिलने वाले आध्यात्मिक लाभ और परिवार में सुख-समृद्धि कैसे आती है।

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हरियाली अमावस्या 2025: सावन मास की अमावस्या को हरियाली अमावस्या के नाम से जाना जाता है, जो इस वर्ष 24 जुलाई 2025, गुरुवार को मनाई जाएगी। इस दिन गुरु पुष्य नक्षत्र का भी योग बन रहा है, जो इसे और भी शुभ बनाता है। हरियाली अमावस्या के दिन पौधारोपण का विशेष महत्व होता है और साथ ही नान्दीमुख श्राद्ध का भी आयोजन किया जाता है। आइए जानते हैं नान्दीमुख श्राद्ध के पीछे की धार्मिक मान्यता, पूजा विधि और इसके लाभ।

नान्दीमुख श्राद्ध क्या है और क्यों किया जाता है?

नान्दीमुख श्राद्ध श्राद्ध के पाँच प्रकारों में से एक है, जिसे वृद्धि श्राद्ध या आभ्युदयिक श्राद्ध भी कहा जाता है। यह श्राद्ध मुख्य रूप से दो कारणों से किया जाता है:

  1. मांगलिक कार्यों से पूर्व पितरों का आशीर्वाद प्राप्त करना: जब घर में विवाह, गृह प्रवेश या कोई अन्य शुभ कार्य होता है, तब पितरों की कृपा और बाधा न आए, इसके लिए नान्दीमुख श्राद्ध किया जाता है। इसका अर्थ है सुखद कार्यों के आरंभ से पहले पितरों का स्मरण और तर्पण करना ताकि कार्य सफल और शुभ हो। यह श्राद्ध किसी भी शुभ अवसर या अमावस्या को किया जा सकता है।

  2. पहली बार श्राद्ध करने के लिए: यदि किसी परिवार में किसी के निधन के बाद पहली बार श्राद्ध किया जा रहा है, तो नान्दीमुख श्राद्ध का विधान है। इससे पितरों को शांति मिलती है और वे अपने संतानों को आशीर्वाद देते हैं। हरियाली अमावस्या को पितरों की मुक्ति और शांति के लिए अत्यंत शुभ दिन माना गया है, इस दिन तर्पण, पिंडदान और अन्य श्राद्ध कर्म किए जाते हैं।

नान्दीमुख श्राद्ध कैसे करें?

नान्दीमुख श्राद्ध की विधि शिव पुराण में विस्तार से वर्णित है। इसे पंडितों की सहायता से किया जाता है, जिसमें कई कर्मकांड शामिल होते हैं जैसे षोडश मातृका पूजन, सप्त घृत मातृका, वसोर्धारा, तर्पण, पिंडदान, ब्राह्मण भोजन आदि। श्राद्ध के दौरान पवित्रिकरण, प्राणायाम, संकल्प और आवाहन जैसे अनुष्ठान भी किए जाते हैं। विशेष रूप से मातृका पूजन और वसोर्धारा के बाद सपिंड, पिंड रहित, आमान्न और हेम श्राद्ध किए जाते हैं।

नान्दीमुख श्राद्ध करने के फायदे

  • सभी मांगलिक कार्य बिना किसी बाधा के सफल होते हैं।

  • पितृदोष, देव दोष, सर्प दोष आदि समाप्त होते हैं।

  • जीवन में आने वाली समस्याओं का समाधान होता है।

  • पितरों को शांति और सद्गति मिलती है।

  • जातक के जीवन में सुख, समृद्धि और शांति बनी रहती है।

हरियाली अमावस्या पर नान्दीमुख श्राद्ध करने से परिवार में खुशहाली आती है और पितरों के आशीर्वाद से जीवन में हर कार्य में सफलता मिलती है। इस शुभ दिन को यादगार बनाने के लिए आप भी यह श्राद्ध विधिपूर्वक कर सकते हैं और अपने परिवार के लिए सुख-समृद्धि की कामना कर सकते हैं।

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