वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) योजना की अगली किश्त को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि सरकार अगली किश्त जारी करने के लिए सभी पहलुओं पर सोच-विचार कर रही है। वैश्विक भू-राजनीतिक तनावों के कारण सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव आया है, जिससे उधारी की लागत बढ़ गई है। इसी वजह से सरकार SGB की नई किश्त जारी करने में सतर्कता बरत रही है।
SGB क्या है?
सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) एक सरकारी प्रतिभूतियां हैं, जिनका मूल्य ग्राम सोने के आधार पर तय होता है। ये आरबीआई द्वारा जारी किए जाते हैं और निवेशकों को भौतिक सोना खरीदने की बजाय डिजिटल तरीके से सोने में निवेश करने का मौका देते हैं। इससे निवेशकों को सुरक्षा और लाभ दोनों मिलते हैं।
क्या SGB योजना विफल हुई?
राज्यसभा सांसद रजनी अशोकराव पाटिल ने सरकार से सवाल किया था कि क्या SGB योजना सफल नहीं रही। इसके जवाब में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने बताया कि 2015 में शुरू हुई यह योजना भौतिक सोने की मांग को कम करने में काफी सफल रही है। 31 मार्च 2025 तक लगभग 146.96 टन सोने के बराबर बॉन्ड जारी किए जा चुके हैं, जिनकी कुल कीमत करीब 72,275 करोड़ रुपये है। ये बॉन्ड 67 किश्तों में जारी किए गए, जिनमें से अब तक 18.81 टन का रिडेम्पशन हो चुका है।
अगली किश्त कब होगी जारी?
पंकज चौधरी ने बताया कि सरकार विभिन्न सरकारी प्रतिभूतियों, ट्रेजरी बिल और SGB के माध्यम से संसाधन जुटाती है। इनमें से विकल्पों का चयन उधारी की लागत के आधार पर किया जाता है। वर्तमान में वैश्विक भू-राजनीतिक तनावों ने सोने की कीमतों को प्रभावित किया है, जिससे उधार की लागत बढ़ी है। इसलिए, सरकार SGB की अगली किश्त जारी करने से पहले लागत को कम करने के प्रयास में है। पिछली किश्त “AGB 2023-24 सीरीज IV” फरवरी 2024 में जारी हुई थी।
SGB की सदस्यता कैसे लें?
SGB की सदस्यता के लिए RBI एक निश्चित अवधि के लिए आवेदन आमंत्रित करता है। आमतौर पर हर 2-3 महीने में RBI प्रेस रिलीज के माध्यम से नई किश्त जारी करता है, जिसमें निवेशकों के लिए एक सप्ताह का आवेदन समय होता है।
SGB की कीमत कैसे तय होती है?
सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड का अंकित मूल्य भारतीय रुपये में तय होता है। यह मूल्य सदस्यता शुरू होने से पहले के सप्ताह के अंतिम तीन कार्यदिवसों में इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन लिमिटेड द्वारा प्रकाशित 999 शुद्धता वाले सोने के बंद भाव के औसत के आधार पर निर्धारित किया जाता है।