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फैटी लिवर (NAFLD) को सुधारने के लिए 5 प्रभावी सप्लीमेंट्स: मिल्क थिसल, ओमेगा-3, विटामिन ई, बीटाइन और NAC। जानें कैसे इन सप्लीमेंट्स से लिवर की सेहत में सुधार हो सकता है और डॉक्टर की सलाह क्यों जरूरी है।
आजकल फैटी लिवर (NAFLD) एक बढ़ती हुई स्वास्थ्य समस्या बन गई है, जिसे शुरुआत में आमतौर पर महसूस नहीं किया जाता, लेकिन समय के साथ यह गंभीर रूप ले सकता है। यह स्थिति तब होती है जब लिवर में अत्यधिक वसा जमा हो जाती है, जो लिवर की कार्यक्षमता को प्रभावित करती है। फैटी लिवर का मुख्य कारण गलत खानपान, अपर्याप्त शारीरिक सक्रियता और अनहेल्दी लाइफस्टाइल हो सकता है।
हालांकि, अच्छी बात यह है कि फैटी लिवर की स्थिति को सप्लीमेंट्स के माध्यम से सुधारा जा सकता है, बशर्ते इसे नियमित रूप से लिया जाए और साथ ही खानपान और लाइफस्टाइल में भी सुधार किया जाए। डॉक्टर्स के अनुसार, सही सप्लीमेंट्स का सेवन लिवर की सेहत में सुधार लाने में मदद कर सकता है।
विभिन्न विशेषज्ञों द्वारा सुझाए गए 5 प्रभावी सप्लीमेंट्स जो फैटी लिवर में सुधार कर सकते हैं:
1. मिल्क थिसल (Milk Thistle)
मिल्क थिसल, जिसे सिलीमारिन भी कहा जाता है, लिवर की कोशिकाओं को हानिकारक टॉक्सिन्स से बचाता है और लिवर में सूजन को कम करता है। यह सप्लीमेंट लिवर के कार्य को सुधारने के लिए बहुत प्रभावी माना जाता है। विभिन्न अध्ययन दर्शाते हैं कि यह सप्लीमेंट NAFLD के मरीजों में लिवर फंक्शन को बेहतर बनाने में मदद करता है।
फायदा: लिवर की रक्षा, सूजन कम करना, और सेल रिपेयर में मदद।
2. ओमेगा-3 फैटी एसिड (Omega-3 Fatty Acids)
ओमेगा-3 फैटी एसिड, जो मुख्य रूप से फिश ऑयल में पाया जाता है, लिवर में वसा के जमा होने को कम करने में मदद करता है। यह फैटी लिवर डिजीज के शुरुआती चरणों को रोकने में कारगर साबित हो सकता है और लिवर में इंसुलिन सेंसिटिविटी को बढ़ाता है, जिससे लिवर के कार्य में सुधार होता है।
फायदा: फैटी लिवर को कंट्रोल करने में मदद, लिपिड प्रोफाइल में सुधार।
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3. विटामिन ई (Vitamin E)
विटामिन ई एक शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट है जो लिवर को ऑक्सीडेटिव डैमेज से बचाता है। यह विशेष रूप से NASH (Non-Alcoholic Steatohepatitis) के मरीजों में लाभकारी है, जहां लिवर में सूजन और डैमेज दोनों होते हैं। यह सप्लीमेंट लिवर के फैटी एसिड अपटेक को नियंत्रित करने और लिवर की संरचना को सुधारने में मदद करता है।
फायदा: लिवर की कोशिकाओं की सुरक्षा, सूजन कम करना, और संरचना में सुधार।
4. बीटाइन (Betaine)
बीटाइन लिवर के लिए फायदेमंद है क्योंकि यह माइटोकॉन्ड्रियल फंक्शन को सुधारता है और शरीर में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को कम करता है। डॉक्टरों के अनुसार, बीटाइन का सेवन लिवर की सेहत को बनाए रखने और फैटी लिवर की समस्या को कम करने में सहायक होता है।
फायदा: लिवर के कार्य में सुधार, फाइब्रोसिस को कम करना, और लिवर में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को नियंत्रित करना।
5. एन-एसेटाइल सिस्टीन (N-Acetyl Cysteine / NAC)
NAC एक शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट है, जो लिवर की कोशिकाओं को हानिकारक टॉक्सिन्स से बचाता है। यह लिवर में सूजन को कम करने, लिवर एंजाइम्स को बेहतर बनाने और सेल रिपेयर में मदद करता है।
फायदा: लिवर की कोशिकाओं का संरक्षण, सूजन कम करना, और सेल रिपेयर को बढ़ावा देना।
आहार और लाइफस्टाइल बदलाव भी हैं महत्वपूर्ण
सिर्फ सप्लीमेंट्स से लिवर की सेहत में सुधार नहीं हो सकता। इसके साथ-साथ सही खानपान, संतुलित आहार और शारीरिक गतिविधि का पालन भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। डॉक्टरों का कहना है कि नियमित रूप से व्यायाम करना, हरे पत्तेदार सब्जियां और ताजे फल खाना, और शराब का सेवन न करना लिवर को हेल्दी रखने में मदद करता है।
डॉक्टर की सलाह जरूरी
हालांकि ये सप्लीमेंट्स लिवर की सेहत को बेहतर बनाने में मददगार हो सकते हैं, लेकिन इन्हें बिना डॉक्टर की सलाह के लेना जोखिमपूर्ण हो सकता है। खासकर यदि आप किसी अन्य बीमारी से पीड़ित हैं या किसी अन्य दवाई का सेवन कर रहे हैं, तो डॉक्टर से सलाह जरूर लें।