दिवाली 2025: क्यों की जाती है लक्ष्मी जी के साथ गणेश जी की पूजा, दिवाली का आध्यात्मिक और पौराणिक रहस्य

दिवाली 2025: क्यों की जाती है लक्ष्मी जी के साथ गणेश जी की पूजा, दिवाली का आध्यात्मिक और पौराणिक रहस्य

जानें क्यों दिवाली 2025 पर लक्ष्मी जी के साथ गणेश जी की पूजा की जाती है। पौराणिक और आध्यात्मिक महत्व को समझें और जानें क्यों यह परंपरा हमारे जीवन में जरूरी है।

दिवाली 2025: दिवाली केवल रोशनी और खुशियों का पर्व नहीं है, बल्कि यह धन, बुद्धि और संतुलन का प्रतीक भी है। इस दिन माता लक्ष्मी की पूजा होती है, जो धन और वैभव की देवी मानी जाती हैं। लेकिन खास बात यह है कि हर पूजा में गणेश जी की उपस्थिति अनिवार्य होती है। तो सवाल उठता है, क्यों दिवाली पर लक्ष्मी जी के साथ गणेश जी की पूजा की जाती है? इसका उत्तर पौराणिक कथाओं और जीवन के गहरे दर्शन में छिपा है।

गणेश जी के साथ लक्ष्मी जी की पूजा का पौराणिक कारण

महापुराणों में एक कथा का उल्लेख है कि एक समय माता लक्ष्मी को अपने वैभव और धन पर गर्व हो गया था। उन्हें लगा कि सम्पूर्ण जगत उनकी कृपा पर निर्भर है। इस पर भगवान विष्णु ने उन्हें समझाया कि भले ही उनके पास धन, वैभव और आदर हो, लेकिन संतान सुख के बिना उनका जीवन अधूरा है। यह सुनकर लक्ष्मी जी का अभिमान टूट गया और वे दुखी हो गईं।

लक्ष्मी जी अपने इस दुःख को माता पार्वती के पास लेकर गईं। पार्वती जी ने अपनी करुणा से गणेश जी को लक्ष्मी जी के पास भेजा और कहा, “आज से गणेश तुम्हारे पुत्र होंगे।” इस दया और स्नेह से लक्ष्मी जी का मन प्रसन्न हो गया। उन्होंने गणेश जी को यह वरदान दिया कि जहां भी मेरी पूजा होगी, वहां तुम्हारी पूजा पहले होगी।

तब से यह परंपरा बन गई कि हर शुभ अवसर, विशेषकर दिवाली पर, पहले गणेश जी की पूजा की जाती है और उसके बाद माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है। ऐसा माना जाता है कि जहां गणेश नहीं होते, वहां लक्ष्मी का स्थायी वास भी नहीं हो सकता।

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दार्शनिक अर्थ – धन और बुद्धि का संतुलन

यह कथा केवल पौराणिक नहीं, बल्कि जीवन के गहरे संदेश को भी व्यक्त करती है। गणेश जी बुद्धि, विवेक और निर्णय क्षमता के प्रतीक हैं, जबकि लक्ष्मी जी धन और समृद्धि की देवी हैं। यदि किसी व्यक्ति के पास धन हो, लेकिन बुद्धि न हो, तो वह धन विनाश का कारण बन सकता है।

सच्ची समृद्धि तभी आती है, जब धन और बुद्धि का संतुलन हो। गणेश जी “शुभ” और “लाभ” दोनों के स्वामी हैं, जो यह सिखाते हैं कि धन का उपयोग तभी सार्थक होता है, जब वह शुभ और सही दिशा में हो। इसी कारण, दिवाली पर पहले गणेश जी की पूजा की जाती है ताकि हम विवेक, निर्णय क्षमता और सद्बुद्धि प्राप्त कर सकें, और फिर लक्ष्मी जी की आराधना से घर में धन और समृद्धि का आगमन हो।

दिवाली पर गणेश जी की पूजा के कारण

  • धन और बुद्धि का संतुलन: यह कथा यह समझाती है कि धन बिना बुद्धि के नुकसानदायक हो सकता है। गणेश जी की पूजा करने से बुद्धि और विवेक में वृद्धि होती है, जिससे धन का सही उपयोग संभव होता है।

  • समृद्धि में वृद्धि: गणेश जी शुभता और लाभ के देवता हैं, इसलिए उनकी पूजा से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और समृद्धि का संचार होता है।

  • घर में सुख-समृद्धि का आगमन: पहले गणेश जी की पूजा से हम अपने घर में सभी रुकावटों और नकारात्मकता को दूर करते हैं, फिर लक्ष्मी जी का स्वागत करते हैं, जिससे सुख और समृद्धि घर में प्रवेश करती है।

दिवाली का आध्यात्मिक महत्व

दिवाली केवल एक पर्व नहीं है, बल्कि यह जीवन में संतुलन स्थापित करने का समय है। गणेश जी और लक्ष्मी जी की पूजा से हम धन और बुद्धि दोनों में संतुलन बनाए रखते हैं, जो एक समृद्ध और सुखमय जीवन की कुंजी है। यह पर्व न केवल भौतिक सुखों को लाता है, बल्कि मानसिक शांति और संतुलन भी प्रदान करता है।

समाप्ति में, यह समझा जा सकता है कि दिवाली पर गणेश जी और लक्ष्मी जी की पूजा न केवल एक धार्मिक परंपरा है, बल्कि यह हमें जीवन में धन और बुद्धि के सही संतुलन को समझने का एक अवसर प्रदान करती है। यही संतुलन हमें न केवल भौतिक समृद्धि, बल्कि मानसिक और आध्यात्मिक समृद्धि भी प्रदान करता है।

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