मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रगति पोर्टल की समीक्षा की और जन-शिकायतों के समाधान पर संवाद किया। उत्तर प्रदेश में प्रगति मॉडल ने इंफ्रास्ट्रक्चर और प्रशासनिक सुधारों में गति लाई है।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रगति पोर्टल की समीक्षा की और इस पर आने वाली जन-शिकायतों के समाधान पर मीडिया से बातचीत की। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रगति पोर्टल केवल बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की निगरानी का मंच नहीं है, बल्कि यह नए भारत की नई कार्यसंस्कृति और सशक्त प्रशासनिक मॉडल का उदाहरण है।
प्रगति पोर्टल: डिजिटल गवर्नेंस और जवाबदेही का मॉडल
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बताया कि प्रगति पोर्टल का आधार प्रो-एक्टिव गवर्नेंस एंड टाइमली इम्प्लीमेंटेशन (PRAGATI) है। यह मॉडल 2003 में गुजरात में ‘स्वागत’ के रूप में शुरू हुआ था, जिसका उद्देश्य नागरिक शिकायतों के समाधान में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना था। वर्ष 2014 के बाद इसे राष्ट्रीय स्तर पर विकसित किया गया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रगति पोर्टल की सफलता इंटेंट, टेक्नोलॉजी और अकाउंटेबिलिटी के संयोजन में निहित है। यह प्लेटफॉर्म अंतर-मंत्रालयीय और अंतर-विभागीय समन्वय के माध्यम से जटिल समस्याओं का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करता है।
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उत्तर प्रदेश में प्रगति मॉडल: एक गेम-चेंजर
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बताया कि उत्तर प्रदेश में प्रगति मॉडल ने राज्य को बॉटलनेक स्टेट से ब्रेकथ्रू स्टेट में बदलने में मदद की है। एक्सप्रेस-वे नेटवर्क, देश का सबसे बड़ा रेलवे नेटवर्क, मेट्रो और एयर कनेक्टिविटी, रैपिड रेल, अंतर्देशीय जलमार्ग और रोपवे जैसे बड़े प्रोजेक्ट समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ रहे हैं।
वर्तमान में उत्तर प्रदेश में ₹10.48 लाख करोड़ की 330 परियोजनाएं चल रही हैं। इनमें परिवहन, ऊर्जा, शहरी विकास, स्वास्थ्य और औद्योगिक विकास से जुड़ी प्रमुख परियोजनाएं शामिल हैं। ₹2.37 लाख करोड़ की 128 परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं, जबकि ₹8.11 लाख करोड़ की 202 परियोजनाएं समय पर प्रगति पर हैं।
टीम इंडिया अप्रोच और समाधान-केंद्रित शासन
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रगति पोर्टल ने टीम इंडिया अप्रोच को मजबूत किया है। अब केंद्र और राज्य सरकारें केवल समस्याओं पर चर्चा नहीं करतीं, बल्कि समाधान पर फोकस करती हैं। वर्ष 2014 से पहले परियोजनाएं स्वीकृत होती थीं लेकिन पूरी नहीं होती थीं। अब हर परियोजना के शिलान्यास के साथ समय-सीमा तय होती है और उसकी नियमित समीक्षा की जाती है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यह भी कहा कि प्रगति मॉडल ने शासन को फाइल-आधारित प्रक्रिया से फील्ड-आधारित परिणामों की दिशा में बदल दिया है। समय और लागत की बर्बादी कम हुई है और केंद्र-राज्य समन्वय के साथ स्पष्ट जवाबदेही सुनिश्चित हुई है।