मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि राज्य के स्कूलों में श्रीमद्भागवत गीता का पाठ्यक्रम होना चाहिए। ये बच्चों को आध्यात्मिक और मानसिक रूप से समृद्ध करने के लिए आवश्यक है।
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य की शिक्षा प्रणाली को और अधिक मजबूत बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। मुख्यमंत्री ने मंगलवार को कैंप कार्यालय में शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक में राज्य के स्कूलों को श्रीमद्भागवत गीता को पाठ्यक्रम में शामिल करने का आदेश दिया। उनका कहना था कि बच्चों को नैतिक और आध्यात्मिक रूप से समृद्ध करने के लिए गीता पढ़नी चाहिए।
बैठक में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य के सभी स्कूलों को मानसून शुरू होने से पहले जांच कराने का आदेश दिया। उन्होंने कहा कि किसी भी दुर्घटना से बचने के लिए स्कूलों की इमारतों, रास्तों, पुलों और अन्य महत्वपूर्ण सुविधाओं की स्थिति का गंभीरता से आकलन किया जाए। उन्होंने शिक्षा क्षेत्र में अगले दस वर्षों के लिए स्पष्ट लक्ष्यों पर भी जोर दिया।
विद्यार्थियों को परिवहन सुविधा का प्रस्ताव
राज्य सरकार ने क्लस्टर स्कूलों में आवासीय हॉस्टल देने की भी योजना बनाई है। इसके लिए दूसरे राज्यों की सर्वश्रेष्ठ प्रथाओं का विश्लेषण करके प्रस्ताव बनाया जाएगा। पहले हर जिले में एक आवासीय हॉस्टल बनाया जाएगा। साथ ही, 559 क्लस्टर विद्यालयों के 15 किमी के क्षेत्र में आने वाले विद्यार्थियों के लिए तत्काल प्रस्ताव भी मांगा गया है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विद्यार्थियों को हर साल समय पर पाठ्यपुस्तकें देने का आदेश दिया। उन्हें तबादला प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए प्रस्तावों को सभी पहलुओं पर गहन अध्ययन करने को कहा गया। साथ ही एनसीसी और एनएसएस को बढ़ावा देने के लिए उन स्कूलों की पहचान करने के निर्देश दिए, जहां अभी यह सुविधाएं नहीं हैं।
शिक्षा को बेहतर बनाने का प्रयास
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि CSRA फंड औद्योगिक संस्थानों से मिलकर शिक्षा क्षेत्र को सुधारेगा। उन्होंने यह भी कहा कि स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण होनी चाहिए। लापरवाही पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। राज्य में राजीव गांधी नवोदय विद्यालयों में प्रवेश सुनिश्चित करने के लिए प्रतीक्षा सूची बनाने के निर्देश भी दिए गए हैं।
महान लोगों की जीवनी, लोककथा, लोकसाहित्य, संगीत, कला, कौशल विकास, पर्यावरणीय अध्ययन और नैतिक शिक्षा भी पाठ्यक्रम में शामिल की जाएगी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की यह पहल न केवल शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि यह छात्रों को सभ्य, संवेदनशील और बुद्धिमान नागरिक बनाने में भी सहायक हो सकती है।
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