बजट 2026-27 में हेल्थ सेक्टर को बड़ी उम्मीदें, मिड-साइज़ और सेकेंडरी अस्पतालों के लिए वित्तीय प्रोत्साहन और सुधार की संभावना। जानें किस तरह स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और पहुंच बढ़ सकती है।
केंद्रीय वित्त बजट 2026-27, जो 1 फरवरी को पेश किया जाएगा, स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए कई नई उम्मीदें लेकर आया है। भारत में स्वास्थ्य पर जीडीपी के अनुपात में खर्च विकसित देशों की तुलना में कम है। विश्व बैंक की 2022 रिपोर्ट के अनुसार, भारत अपनी जीडीपी का केवल 3-4% स्वास्थ्य सेवाओं पर खर्च करता है, जबकि अमेरिका में यह 17-18%, जापान में 10-11%, रूस में 5-6% और चीन में करीब 7% है।
स्वास्थ्य क्षेत्र पर पिछले वर्षों का बजट ट्रेंड
पिछले चार वर्षों में भारत में स्वास्थ्य पर सरकारी खर्च में लगातार वृद्धि देखी गई है:
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2022-23: 86,606 करोड़ रुपये
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2023-24: 88,956 करोड़ रुपये
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2024-25: लगभग 90,000 करोड़ रुपये
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2025-26: लगभग 99,858.56 करोड़ रुपये
इस बढ़ोतरी के बावजूद, विकसित देशों के मुकाबले स्वास्थ्य क्षेत्र का बजट कम ही है।
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मिड-साइज़ और सेकेंडरी अस्पतालों की भूमिका
प्रकाश हॉस्पिटल, नोएडा के चेयरमैन और एमडी डॉ. वी. एस. चौहान के अनुसार, मिड-साइज़ और सेकेंडरी अस्पताल भारत की स्वास्थ्य प्रणाली की रीढ़ हैं। बजट 2026 में इन अस्पतालों के लिए सस्ती पूंजी, तेज नियामक मंजूरी और यथार्थवादी प्रतिपूर्ति प्रणाली की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि सरकारी योजनाओं के तहत भुगतान में देरी अस्पतालों की पुनर्निवेश क्षमता को प्रभावित करती है और नई स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार को धीमा करती है।
बजट 2026-27 में स्वास्थ्य क्षेत्र की प्राथमिकताएं
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बुनियादी ढांचे के विकास और डिजिटल हेल्थ को अपनाना
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स्वास्थ्यकर्मियों की संख्या बढ़ाना
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पीएमजेएवाई के तहत समयबद्ध और पारदर्शी भुगतान
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चिकित्सा उपकरणों और इनपुट्स पर जीएसटी तर्क संगत करना
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किफायती वित्तपोषण और भूमि उपलब्धता
इन कदमों से न केवल स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और दक्षता बढ़ेगी, बल्कि मरीजों पर पड़ने वाले खर्च को भी नियंत्रित किया जा सकेगा।