अगर आप वर्कआउट या स्ट्रेंथ ट्रेनिंग कर रहे हैं और आपका बॉडी फैट घट रहा है लेकिन वजन मशीन पर वैसा का वैसा दिख रहा है, तो परेशान होने की जरूरत नहीं है। एक्सपर्ट्स के अनुसार यह बॉडी रिकॉम्पोजिशन की प्रक्रिया है, जिसमें फैट कम होने के साथ मसल्स बनती हैं। मसल्स फैट की तुलना में ज्यादा डेंस होती हैं, इसलिए वजन मशीन पर बदलाव दिखाई नहीं देता, लेकिन आपका शरीर पहले से ज्यादा फिट और टोन दिखने लगता है।
बॉडी रिकॉम्पोजिशन क्या है?
स्ट्रेंथ ट्रेनिंग या वर्कआउट के दौरान जब फैट कम होने लगता है और मसल्स बनती हैं, इसे बॉडी रिकॉम्पोजिशन कहा जाता है। मसल्स घनत्व में ज्यादा होती हैं और फैट की तुलना में कम जगह घेरती हैं। यही वजह है कि कमर पतली और हाथ-पैर मजबूत दिखते हैं, लेकिन वजन मशीन पर बदलाव नहीं दिखता।
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वजन मशीन क्यों नहीं दिखाती फैट लॉस
सिर्फ़ वजन देखकर शरीर की फिटनेस का अंदाजा नहीं लगाया जा सकता। दो लोग समान वजन के हो सकते हैं, लेकिन जिनमें मसल्स अधिक हों, उनका शरीर छोटा और टोन दिखेगा। इसलिए सिर्फ वजन पर ध्यान देने से भ्रम हो सकता है।
देर रात जिम और पोस्ट-वर्कआउट भूख
ऑफिस के बाद देर रात जिम जाने वाले लोग अक्सर वर्कआउट के बाद ज्यादा खाते हैं। बिना ध्यान दिए भारी या सादा खाना खाने से फैट बर्न की प्रक्रिया धीमी हो सकती है। रिसर्च बताती है कि देर रात भारी खाना खाने से अगली सुबह भूख बढ़ती है और फैट लॉस प्रभावित होता है।
लंबे समय तक बैठना और वजन अटकना
दिन में लगातार 9-10 घंटे बैठकर काम करने से NEAT (Non-Exercise Activity Thermogenesis) कम हो जाता है। यानी रोजमर्रा की छोटी एक्टिविटी से जो कैलोरी बर्न होती है, वह घट जाती है। इसके अलावा वाटर रिटेंशन की वजह से भी वजन अटका रह सकता है। ज्यादा नमक, लंबी अवधि तक एक ही पोजीशन में बैठना, हार्मोनल बदलाव या कुछ दवाइयां शरीर में पानी रोक सकती हैं।