Apple Investment In India: अमेरिका की दिग्गज टेक्नोलॉजी कंपनी ऐपल (Apple) ने भारत में अपने उत्पादन को बढ़ाने के लिए 1.5 अरब डॉलर (लगभग 12,834 करोड़ रुपये) का बड़ा निवेश करने का फैसला किया है।
Apple Investment In India: अमेरिका की दिग्गज टेक्नोलॉजी कंपनी ऐपल (Apple) ने भारत में अपने उत्पादन को बढ़ाने के लिए 1.5 अरब डॉलर (लगभग 12,834 करोड़ रुपये) का बड़ा निवेश करने का फैसला किया है। यह निवेश फॉक्सकॉन (Foxconn), जो ऐपल का मैन्युफैक्चरिंग पार्टनर है, के माध्यम से किया जाएगा। इस निवेश से भारत में ऐपल के उत्पादन को और बढ़ावा मिलेगा और दक्षिण भारत में कंपनी की उत्पादन क्षमता में सुधार होगा।
इस फैसले के बाद भारत में ज्यादातर आईफोन बनाए जाने की उम्मीद जताई जा रही है। इस निवेश का उद्देश्य ऐपल को अपनी आपूर्ति श्रृंखला को विविधतापूर्ण बनाना और चीन पर निर्भरता को कम करना है। खासतौर पर जब अमेरिका और चीन के बीच व्यापारिक तनाव बढ़ता जा रहा है, ऐसे में ऐपल की यह रणनीति भविष्य में अमेरिका में बिकने वाले अधिकतर आईफोन को भारत में ही बनाने की है।
इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ऐपल के सीईओ टिम कुक से आग्रह किया था कि वे भारत में उत्पादन करने के बजाय अमेरिका में मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स शुरू करें। उनका मानना था कि इससे अमेरिका में रोजगार बढ़ेगा। लेकिन ऐपल ने ट्रंप की सलाह को नजरअंदाज करते हुए भारत में अपने उत्पादन को बढ़ावा देने का फैसला लिया है।
भारत में ऐपल का उत्पादन पिछले कुछ सालों में बढ़ा है। बीते एक साल में ऐपल ने भारत में लगभग 22 अरब डॉलर के आईफोन बनाए हैं, जो पिछले वर्ष की तुलना में 60 फीसदी अधिक है। भारत में बनने वाले आईफोन का बड़ा हिस्सा फॉक्सकॉन के दक्षिण भारत स्थित कारखानों से आता है। इसके अलावा, टाटा ग्रुप और पेगाट्रॉन (Pegatron) जैसी कंपनियां भी ऐपल के लिए भारत में मैन्युफैक्चरिंग कर रही हैं।
भारत में उत्पादन बढ़ने से केवल ऐपल को ही नहीं, बल्कि देश में रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। यह निवेश भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण क्षेत्र को नई ऊंचाइयों पर ले जा सकता है और भारत को वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग हब बनने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।
कुल मिलाकर, ऐपल का यह कदम न केवल आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि रणनीतिक रूप से भी यह ऐपल को वैश्विक व्यापार अस्थिरता से सुरक्षित रखने में मदद करेगा और भारत को वैश्विक तकनीकी नक्शे पर और मजबूती देगा।
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