Appendix Pain: पेट के दाहिने हिस्से में बार-बार दर्द अपेंडिक्स की सूजन (अपेंडिसाइटिस) का संकेत हो सकता है। जानिए इसके लक्षण, कारण, इलाज और बचाव के असरदार घरेलू उपाय।
Appendix Pain: अगर आपको अक्सर पेट के निचले दाएं हिस्से में दर्द होता है, तो इसे सिर्फ गैस या एसिडिटी न समझें। यह अपेंडिसाइटिस यानी अपेंडिक्स में सूजन का संकेत हो सकता है, जो समय रहते इलाज न मिलने पर जानलेवा संक्रमण में बदल सकता है। आइए जानें इसके लक्षण, कारण और उपचार से जुड़ी जरूरी बातें।
अपेंडिक्स क्या है और यह क्यों जरूरी है?
अपेंडिक्स एक उंगली के आकार की छोटी थैली होती है, जो बड़ी आंत से जुड़ी होती है। माना जाता है कि यह शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली में सहायता करता है और आंतों के अच्छे बैक्टीरिया को सुरक्षित रखता है। हालांकि इसका सटीक कार्य अब भी पूरी तरह ज्ञात नहीं है, लेकिन इसकी सूजन यानी अपेंडिसाइटिस एक मेडिकल इमरजेंसी मानी जाती है।
अपेंडिसाइटिस के सामान्य लक्षण
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पेट के निचले दाएं हिस्से में तेज़ दर्द
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दर्द धीरे-धीरे नाभि से दाएं नीचे की ओर बढ़ना
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खांसने, हिलने-डुलने या चलने पर दर्द बढ़ जाना
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भूख कम लगना
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हल्का बुखार
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कब्ज या दस्त
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पेट में सूजन और भारीपन
यदि इन लक्षणों में से कुछ भी महसूस हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। लापरवाही की स्थिति में अपेंडिक्स फट सकता है, जिससे पेट में गंभीर संक्रमण हो सकता है।
अपेंडिक्स की समस्या के बढ़ते कारण
आजकल की गलत जीवनशैली, अनहेल्दी डाइट और कम पानी पीना इस समस्या को तेजी से बढ़ा रहे हैं। खासतौर पर:
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फाइबर की कमी वाली डाइट
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अधिक जंक फूड और प्रोसेस्ड फूड्स का सेवन
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पाचन तंत्र की गड़बड़ियां
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शरीर में पानी की कमी
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कब्ज की समस्या
अपेंडिक्स का इलाज
अगर समय पर अपेंडिसाइटिस की पहचान हो जाए, तो इसका इलाज संभव है:
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आमतौर पर सर्जरी द्वारा अपेंडिक्स को हटाया जाता है
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उसके बाद एंटीबायोटिक दवाओं का पूरा कोर्स दिया जाता है
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मरीज सामान्य जीवन जल्दी ही शुरू कर सकता है, बशर्ते समय पर इलाज हो
सर्जरी न कराने पर अपेंडिक्स फट सकता है और पेट में मवाद भरने या सेप्सिस जैसी स्थिति बन सकती है, जो जानलेवा हो सकती है।
अपेंडिक्स से बचाव के तरीके
हालांकि अपेंडिक्स को पूरी तरह रोकना संभव नहीं है, लेकिन नीचे दिए गए उपाय जोखिम को कम कर सकते हैं:
- अधिक फाइबर युक्त आहार लें – जैसे साबुत अनाज, फल, सब्जियां, दालें
- दिनभर में कम से कम 2-3 लीटर पानी पिएं
- प्रोबायोटिक फूड्स (जैसे दही) का नियमित सेवन करें
- जंक फूड और ऑयली खाना सीमित करें
- कब्ज से बचें – इसके लिए नियमित व्यायाम करें और संतुलित आहार लें