हरिद्वार मंदिर हादसे के बाद उत्तराखंड सरकार ने सभी प्रमुख तीर्थस्थलों के लिए मास्टर प्लान तैयार करने का आदेश जारी किया है। जानें इसमें क्या-क्या होगा शामिल।
उत्तराखंड में 27 जुलाई 2025 को हरिद्वार स्थित मनसा देवी मंदिर में हुई भीड़भाड़ और भगदड़ की घटना के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक बड़ा निर्णय लिया है। प्रदेश के सभी प्रमुख धार्मिक स्थलों के लिए मास्टर प्लान तैयार किया जाएगा, जिससे तीर्थयात्रियों की सुरक्षा और सुविधाएं सुनिश्चित की जा सकें।
क्या है मास्टर प्लान का उद्देश्य?
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि उत्तराखंड हर वर्ष करोड़ों श्रद्धालुओं और पर्यटकों का स्वागत करता है। इसलिए यह जरूरी हो गया है कि धार्मिक स्थलों पर भीड़ प्रबंधन, आपातकालीन व्यवस्था, सुरक्षा बलों की तैनाती और जनसुविधाओं को और बेहतर बनाया जाए।
मुख्यमंत्री के निर्देशों के अनुसार, प्रमुख सचिव आरके सुधांशु ने सचिव पर्यटन को इस योजना पर तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
मास्टर प्लान में क्या-क्या होगा शामिल?
मास्टर प्लान के तहत निम्नलिखित बिंदुओं पर विशेष ध्यान दिया जाएगा:
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भीड़ नियंत्रण और धारण क्षमता का निर्धारण
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पृथक प्रवेश और निकास मार्ग
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प्रतीक्षा के लिए अतिरिक्त स्थान
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आपातकालीन निकासी व्यवस्था
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साफ पेयजल, शौचालय और प्राथमिक उपचार की व्यवस्था
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आधुनिक सूचना एवं मार्गदर्शन प्रणाली
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पर्याप्त पार्किंग और CCTV निगरानी
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सुरक्षा बलों की तैनाती
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अवैध अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई
प्रमुख तीर्थस्थलों की पहचान कर उनके लिए जोन-वार मास्टर प्लान तैयार किए जाएंगे, जिसमें स्थानीय प्रशासन, पुलिस, पर्यटन विभाग और नगर निकायों की संयुक्त भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।
हरिद्वार हादसे के बाद जागा प्रशासन
हरिद्वार में हाल ही में हुई मंदिर भगदड़ की घटना में कई श्रद्धालु घायल हुए थे। मुख्यमंत्री धामी ने स्वयं स्थल का निरीक्षण किया और अधिकारियों को तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने के निर्देश दिए।
इसी कड़ी में यह मास्टर प्लान पूरे राज्य के धार्मिक स्थलों जैसे कि केदारनाथ, बद्रीनाथ, हर की पैड़ी, तुंगनाथ, गंगोत्री, यमुनोत्री और अन्य स्थानों पर व्यवस्थित तीर्थयात्रा को सुनिश्चित करेगा।
क्या बोले सीएम धामी?
मुख्यमंत्री धामी ने कहा, “उत्तराखंड आध्यात्मिक पर्यटन का केंद्र है। यहां हर साल करोड़ों श्रद्धालु आते हैं। तीर्थयात्रियों की सुरक्षा, सुविधा और संतुष्टि हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। सभी धार्मिक स्थलों का मास्टर प्लान बनाकर यात्रा को सुरक्षित और सुव्यवस्थित बनाया जाएगा।”
भविष्य की योजना
मास्टर प्लान के तहत डिजिटल टूरिस्ट मैनेजमेंट सिस्टम, ई-पास पंजीकरण, मल्टी-लेवल पार्किंग, और ग्रीन जोन जैसे नए उपाय भी लागू किए जाएंगे। इससे धार्मिक पर्यटन को संरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल बनाया जा सकेगा।