प्रदेश सरकार की दूरदर्शी नीतियों और सकारात्मक सोच से सशक्त हो रहा बागवानी क्षेत्र

फीचर
12 अक्तूबर, 2025

प्रदेश सरकार की दूरदर्शी नीतियों और सकारात्मक सोच से सशक्त हो रहा बागवानी क्षेत्र
सेब सीजन 2025, विपरीत परिस्थितियों में सफलता की इबारत

हिमाचल प्रदेश के बागवानी इतिहास में वर्ष 2025 एक स्वर्णिम अध्याय के रूप में दर्ज हो रहा है। प्राकृतिक आपदाओं, लगातार मूसलाधार बारिश, भूस्खलन और सड़क मार्ग अवरुद्ध होने जैसी चुनौतियों के बावजूद राज्य सरकार ने अपनी दूरदर्शी नीतियों, त्वरित निर्णय क्षमता और संवेदनशील नेतृत्व के बल पर न केवल स्थिति को नियंत्रित किया बल्कि बागवानी क्षेत्र को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया।
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू की सकारात्मक सोच, पारदर्शी प्रशासनिक दृष्टिकोण और किसान-बागवान केंद्रित नीतियों ने हिमाचल में बागवानी क्षेत्र में व्यवस्था परिवर्तन की मिसाल पेश की है। भूस्खलन और सड़कों के अवरुद्ध होने के बावजूद वर्ष 2025 का सेब सीजन हिमाचल में बहुत सफल सीजन रहा। राज्य सरकार और बागवानी विभाग ने मिलकर युद्ध स्तर पर सड़कें बहाल कीं जिससे बागवान अपनी उपज को समय पर मंडियों तक पहुंचा सके।
हिमाचल प्रदेश राज्य कृषि विपणन बोर्ड के अनुसार 3 अक्तूूबर, 2025 तक कुल 2,60,83,458 सेब पेटियों का कारोबार हुआ जबकि वर्ष 2024 में 1,82,63,874 सेब पेटियों का कारोबार हुआ था। आंकड़े दर्शाते हैं कि इस वर्ष सेब कारोबार में 43 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।
दिल्ली की आजादपुर मंडी में हिमाचल के सेब की अत्यधिक मांग रही। ए-ग्रेड रॉयल डिलीशियस 2300 रुपये प्रति 20 किलो पेटी और गोल्डन डिलीशियस 1200 रुपये प्रति पेटी बिकी। यह हिमाचल के सेब की गुणवत्ता, ब्रांड वैल्यू और उपभोक्ता विश्वास का जीवंत प्रमाण है।
मंडी मध्यस्थता योजना के तहत एचपीएमसी द्वारा इस वर्ष 83,788 मीट्रिक टन सेब की रिकॉर्ड खरीद की गई। मंडी मध्यस्थता योजना की यह अब तक की सबसे बड़ी खरीद में से एक है, जिससे हजारों बागवानों को राहत मिली। बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी ने कहा कि सरकार ने बागवानों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। सभी बागवानी क्षेत्रों में सड़क बहाली कार्य, परिवहन सुविधा और मंडी संचालन में सरकार की तत्परता से बागवानों को उनकी उपज का समय पर और उचित मूल्य मिला।
एकीकृत बागवानी विकास मिशन के अंतर्गत हिमाचल प्रदेश को 25 करोड़ रुपये की पहली किस्त प्राप्त हुई। इसमें 22.50 करोड़ रुपये केंद्र सरकार का अंश एवं 2.50 करोड़ रुपये राज्य सरकार का हिस्सा है। इस राशि में से 14.50 रुपये करोड़ रुपये किसानों को विभिन्न घटकों जैसे फलों, सब्जियों, मसालों एवं फूलों का क्षेत्र विस्तार, मशरूम उत्पादन, संरक्षित खेती (ग्रीन/पॉलीहाउस), एंटीहेल नेट, फार्म गेट पैक हाउस, कोल्ड स्टोरेज और फूड प्रोसेसिंग ईकाइयों के लिए वितरित किए गए।
वर्तमान में हिमाचल प्रदेश की बागवानी प्रदेश की आर्थिक रीढ़, किसानों की समृद्धि और पहाड़ों की पहचान बन चुकी है। यह सकारात्मक परिवर्तन हिमाचल को आत्मनिर्भर, सशक्त और समृद्ध बागवानी राज्य बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो रहा है।

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